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राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: अमृत महोत्सव की तैयारी

राजस्थान विधानसभा अपने 75 वर्षों का जश्न मनाने के लिए 'अमृत महोत्सव' का आयोजन कर रही है। 15 जुलाई से शुरू होने वाले इस महोत्सव में लोकतांत्रिक और विधायी यात्रा को उजागर किया जाएगा। समारोह में पूर्व और वर्तमान सदस्यों की भागीदारी होगी, और महत्वपूर्ण कानूनों पर चर्चा की जाएगी। जानें इस ऐतिहासिक अवसर की विशेषताएँ और कार्यक्रमों के बारे में।
 

राजस्थान विधानसभा का ऐतिहासिक जश्न

राजस्थान विधानसभा अपने 75 वर्षों के सफर को मनाने जा रही है। इस महत्वपूर्ण अवसर को खास बनाने के लिए 15 जुलाई से एक साल तक चलने वाले ‘अमृत महोत्सव’ की शुरुआत होगी। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समारोह का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की लोकतांत्रिक और विधायी यात्रा को उजागर करना है।


15 जुलाई को होने वाले उद्घाटन समारोह में विधानसभा के पूर्व और वर्तमान सदस्य शामिल होंगे। इस भव्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला होंगे, जबकि समापन सत्र में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन उपस्थित रहेंगे। इस विशेष अवसर पर राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी आमंत्रित किया गया है।


एक वर्ष तक चलने वाले इस ‘अमृत महोत्सव’ में कुल चार प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का फोकस लोकतंत्र को मजबूत करने, विधायी प्रक्रियाओं और संवैधानिक मूल्यों पर होगा, जिसके लिए संसदीय और संवैधानिक विशेषज्ञों के विशेष सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। देवनानी ने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से राजस्थान विधानसभा की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।


उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की विभिन्न विधानसभाओं द्वारा पारित 23 महत्वपूर्ण कानूनों पर गहन चर्चा की जाएगी। इनमें राजस्थान जागीर पुनर्ग्रहण एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1952; राजस्थान जमींदारी एवं बिस्वेदारी उन्मूलन अधिनियम, 1959; राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम, 1959; राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964; राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973; राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2001 और राजस्थान लोक सेवाओं की गारंटी अधिनियम, 2011 जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री इन कानूनों के सामाजिक एवं प्रशासनिक प्रभावों पर अपने अनुभव साझा करेंगे।


इसके अतिरिक्त, समारोह के दौरान संसदीय परंपराओं के विकास, विधायी प्रक्रियाओं, सदन की गरिमा को बनाए रखने, विधानसभाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों और विधानसभा के डिजिटल परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि इन कानूनों ने राजस्थान में सामाजिक बदलाव, प्रशासनिक सुधार, शिक्षा के प्रसार, पारदर्शिता और जनकल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


इस ऐतिहासिक समारोह में विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के योगदान को भी सराहा जाएगा। सम्मानित होने वाले प्रमुख व्यक्तियों में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत, सुमित्रा सिंह, दीपेंद्र सिंह शेखावत, कैलाश चंद्र मेघवाल और सी. पी. जोशी शामिल हैं। इसके साथ ही पूर्व उपाध्यक्ष तारा भंडारी, रामनारायण मीणा और राव राजेंद्र सिंह को भी सम्मानित किया जाएगा।