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राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा

राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें कई अभ्यर्थियों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की। एसओजी ने इस मामले की जांच शुरू की है और कई डॉक्टरों और बिचौलियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई अभ्यर्थियों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम थी, जिससे वे आरक्षण के पात्र नहीं थे। प्रशासनिक और चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है, और आने वाले दिनों में और बड़े नामों का खुलासा होने की संभावना है।
 

राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े का खुलासा


जयपुर: राजस्थान में सरकारी भर्तियों में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसओजी ने एक और बड़े स्कैम का पर्दाफाश किया है। दरअसल, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की गई थी। इस मामले की जांच के बाद अब उन अभ्यर्थियों के साथ-साथ, जिन डॉक्टरों ने प्रमाण-पत्र जारी किए और बिचौलियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जा रही है।

40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता के बावजूद नौकरी
जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर डिजिटल आईडी का दुरुपयोग किया और फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाए। लोकोमोटर दिव्यांगता की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 44 अभ्यर्थियों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम थी, जिससे वे आरक्षण के पात्र नहीं थे। फिर भी, उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल कर ली।

एसओजी की जांच के दायरे में बड़ी भर्तियां
अब तक की जांच में 2015 से 2023 के बीच हुई कई महत्वपूर्ण भर्तियां जांच के घेरे में हैं, जिनमें शामिल हैं:
रीट (REET)-2022 (लेवल-1 और 2)
वरिष्ठ अध्यापक एवं स्कूल व्याख्याता भर्ती
असिस्टेंट प्रोफेसर व सहायक आचार्य भर्ती
पशु चिकित्सक सीधी भर्ती, एएनएम (ANM)
कनिष्ठ सहायक, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती।

एसएमएस मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट ने खोली सच्चाई
एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, एसओजी को 27 गंभीर शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद संदिग्ध अभ्यर्थियों का सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से पुनः परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ये अभ्यर्थी आरक्षण के दायरे से बाहर हैं। हालांकि, एक अभ्यर्थी को जांच के बाद क्लीन चिट दी गई है, जो वास्तव में दिव्यांग पाया गया।

एफआईआर दर्ज किए गए नाम
एसओजी ने इस मामले में न केवल अभ्यर्थियों बल्कि फर्जीवाड़े में शामिल डॉक्टरों और बिचौलियों पर भी केस दर्ज किया है।
अभ्यर्थियों में हन्दू गुर्जर, तगाराम, किशोर सिंह, महेश कुमार, लोकेश, नरेश, अरविंद, ललिता, पिंकी कुमारी, महिपाल सिंह, मनीष, भानुप्रताप सहित दो दर्जन से अधिक नाम शामिल हैं।

डॉक्टर और बिचौलिए: डॉ. रामलाल, डॉ. संकनालाल मीणा, डॉ. प्रकाश कुमार वर्मा के साथ-साथ सवाई सिंह गुर्जर, रणजीत सिंह, सत्यपाल सिंह, हेमंत सिंह राठौड़ और विनोद कंवर शेखावत जैसे बिचौलियों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है।

आने वाले दिनों में और खुलासे संभव
एसओजी की इस कार्रवाई से प्रशासनिक और चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि भविष्य में कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।