राजस्थान में मत्स्य विभाग की नई पहल: शिकायतों का त्वरित निस्तारण और तालाबों का ऑनलाइन ऑक्शन
मत्स्य विभाग की निदेशक का निरीक्षण
जयपुर। राजस्थान के मत्स्य विभाग की निदेशक, श्रीमती संचिता बिश्नोई ने विभाग से जुड़ी शिकायतों और लंबित मामलों की समीक्षा के लिए निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शिकायतों का सही तरीके से वर्गीकरण करें और समय पर गुणवत्तापूर्ण समाधान प्रदान करें। निरीक्षण के दौरान, निदेशक ने 90 से 180 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों पर सख्त रुख अपनाया और अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर इनका त्वरित समाधान करने के लिए कहा।
सीधी बातचीत और त्वरित समाधान
निदेशक ने निरीक्षण के दौरान कई शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन पर बात की और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। एक शिकायत पर उन्होंने तुरंत संबंधित तालाब के पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए, ताकि जलीय पर्यावरण सुरक्षित रहे और मत्स्य पालकों को कोई नुकसान न हो।
तालाबों का ऑनलाइन ऑक्शन और हैचरी विकास
श्रीमती बिश्नोई ने तालाबों और जलाशयों की ऑनलाइन नीलामी से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने के निर्देश दिए, ताकि नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हैचरी के विकास पर जोर दिया।
नए रोजगार के अवसर
मत्स्य निदेशक ने बताया कि राजस्थान में लगभग 2,500 से 3,000 छोटे और बड़े बांधों में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में स्वरोजगार के कई अवसर मौजूद हैं। सही प्रबंधन और पारदर्शी नीलामी के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार के द्वार खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री की पहल
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार, सभी विभागों के सचिव निर्धारित तिथियों पर राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) कंट्रोल रूम में उपस्थित होकर शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। इस पहल से नागरिक घर बैठे अपनी शिकायतें दर्ज कर त्वरित समाधान प्राप्त कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ भी मौजूद थे।