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राजस्थान में बढ़ते युद्ध के प्रभाव: जयपुर एयरपोर्ट पर उड़ानों में कमी और बढ़ते किराए

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर राजस्थान के जयपुर एयरपोर्ट पर साफ नजर आ रहा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच के संघर्ष के चलते उड़ानें रद्द हो रही हैं और किराए में भारी वृद्धि हो रही है। शेखावाटी क्षेत्र के प्रवासी, जो ईद या छुट्टियों पर घर लौटने की योजना बना रहे थे, अब अनिश्चितता में हैं। जानें इस संकट का व्यापार और पर्यटन पर क्या प्रभाव पड़ा है।
 

जयपुर एयरपोर्ट पर बढ़ते तनाव के असर


जयपुर/सीकर: पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति ने राजस्थान के निवासियों के सपनों पर एक बड़ी बाधा खड़ी कर दी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। खाड़ी देशों के लिए उड़ानें न केवल रद्द हो रही हैं, बल्कि जो उड़ानें संचालित हो रही हैं, उनका किराया भी आसमान छू रहा है।

24 घंटे की देरी और रूट में बदलाव
ईरान के हवाई क्षेत्र के बंद होने और सुरक्षा कारणों से एयरलाइनों ने जयपुर से अपनी उड़ानों में भारी कमी की है। इसका सबसे अधिक प्रभाव जयपुर-अबू धाबी और दुबई रूट पर पड़ा है। पहले जहां रोजाना दो उड़ानें थीं, अब केवल एक शाम की उड़ान ही उपलब्ध है। दुबई की नियमित उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं, जबकि मस्कट की फ्लाइट अब सप्ताह में केवल दो दिन ही उड़ान भर रही है। शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) के हजारों प्रवासी, जो ईद या छुट्टियों पर घर लौटने की योजना बना रहे थे, अब अनिश्चितता में हैं।

किराए में भारी वृद्धि
युद्ध के कारण विमानों को अब लंबे रूट से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे ईंधन की खपत में वृद्धि हुई है। इसका बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है। इटली और खाड़ी देशों से भारत आने वाली टिकटें, जो पहले लगभग 50,000 रुपये थीं, अब 1,50,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। एक सामान्य मजदूर या कामगार के लिए इतना किराया देना असंभव हो रहा है।

शेखावाटी के प्रवासियों की समस्याएं
सीकर के जालेऊ निवासी हसन खान की कहानी उन हजारों लोगों की स्थिति को दर्शाती है जो इस समय खाड़ी देशों के एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं। हसन बताते हैं, ‘मेरी शारजाह-जयपुर फ्लाइट बिना किसी सूचना के रद्द कर दी गई। मुझे दुबई से टैक्सी के जरिए मस्कट भेजा गया और वहां से दूसरी फ्लाइट लेकर जयपुर पहुंचा। इस यात्रा में जितना पैसा खर्च हुआ, उससे कहीं अधिक मानसिक तनाव सहना पड़ा।’ कई प्रवासियों को चिंता है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो उनका वतन लौटना तो दूर, वहां नौकरी भी बचाना मुश्किल हो जाएगा।

व्यापार और पर्यटन पर भी संकट
जयपुर एयरपोर्ट से होने वाला ‘कार्गो व्यापार’ भी प्रभावित हुआ है। कीमती पत्थर, रत्न और हस्तशिल्प का निर्यात करने वाले व्यापारियों के ऑर्डर फंसे हुए हैं। पर्यटन सीजन के अंत में विदेशी सैलानियों की आवाजाही में भी कमी आई है।