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राजस्थान में दहेज प्रथा के खिलाफ उठी नई आवाज़

राजस्थान के जयपुर में एक शादी समारोह में दूल्हे ने दहेज के रूप में दिए गए 11 लाख रुपये को लौटाकर समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक नई पहल की है। इस घटना ने न केवल वरपक्ष की सराहना की है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि समाज में दहेज के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है। नई पीढ़ी अब दहेज को हेय दृष्टि से देख रही है और इस बदलाव की लहर अन्य समुदायों में भी फैल रही है।
 

दहेज का दानव हुआ पराजित

राजस्थान के जयपुर में एक शादी समारोह में दहेज की प्रथा को एक बार फिर चुनौती दी गई है। वरपक्ष ने दहेज के रूप में दिए गए 11 लाख रुपये को स्वीकार करने से मना कर दिया। यह घटना इस बात का संकेत है कि समाज में दहेज के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है।


इस विशेष शादी में दुल्हन के पिता ने दूल्हे को शगुन के तौर पर 11 लाख रुपये दिए, लेकिन दूल्हे शैलेंद्र सिंह और उनके पिता विजय सिंह ने इसे वापस लौटा दिया। इस निर्णय की चारों ओर प्रशंसा हो रही है, और दुल्हन के पिता इस भावुक पल में अपने समधी को गले लगाते नजर आए।


वरपक्ष की सराहना

जयपुर में रहने वाले विजय सिंह राठौड़, जो प्रॉपर्टी के व्यवसाय से जुड़े हैं, ने अपने बेटे शैलेंद्र की शादी 5 फरवरी को कंचन शेखावत से की। कंचन एक शिक्षित युवती हैं, जिन्होंने एमएससी और बीएड की डिग्री प्राप्त की है।


शादी में दूल्हे और उनके पिता ने दहेज को अस्वीकार कर समाज को एक प्रेरणादायक संदेश दिया। इस निर्णय की सभी ने सराहना की, और दुल्हन के पिता ने भावुक होकर समधी को गले लगाया।


समाज में बदलाव की लहर

राजस्थान के राजपूत समाज में दहेज प्रथा पर सवाल उठने लगे हैं। हाल के समय में, कई स्थानों पर दहेज को अस्वीकार करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। यह बदलाव केवल राजपूत समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य समुदायों में भी देखने को मिल रहा है।


नई पीढ़ी अब शादी के समय दहेज को हेय दृष्टि से देख रही है। हाल ही में बाड़मेर में एक युवती ने अपने पिता से दहेज लेने से मना कर दिया और उस राशि को समाज की लड़कियों के छात्रावास के लिए दान कर दिया। इसी तरह, झुंझुनूं में भी एक पिता ने अपने बेटे की शादी महज एक रुपये और नारियल के साथ की, और बहू को मुंह दिखाई में 11 लाख रुपये की कार भेंट की।