राजस्थान में कृषि विकास के लिए नई पहल: गैर-वित्तपोषित समझौतों का हस्ताक्षर
कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में कदम
जयपुर। राज्य सरकार किसानों की आय में सुधार, कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग ने राज्य में कार्यरत विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सिविल सोसायटी संगठनों, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं और एग्रीटेक कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए 30 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ गैर-वित्तपोषित समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर करने की योजना बनाई है।
आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि शुक्रवार को पंत कृषि भवन, जयपुर में एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, मृदा उर्वरता में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से नहीं हो सकता, बल्कि सरकार, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों और किसानों के बीच एक मजबूत साझेदारी की आवश्यकता है।
इसी सोच के तहत विभाग ने विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने की पहल की है। 12 जनवरी, 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में विशेषज्ञ संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। प्राप्त सुझावों के आधार पर सहयोग का यह अभिनव मॉडल विकसित किया गया है, जिसके तहत अब विभिन्न संस्थाओं के साथ गैर-वित्तपोषित समझौते किए जा रहे हैं।
इन समझौतों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं आएगा। संस्थाएँ अपनी विशेषज्ञता, तकनीकी क्षमता, अनुभव और संसाधनों के माध्यम से कृषि विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद करेंगी। इससे विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुँचेगा और कृषि विकास की गति को नई दिशा मिलेगी।
इन एमओयू का मुख्य उद्देश्य राज्य में प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली, मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार, डिजिटल कृषि, किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, महिला एवं युवा किसानों का सशक्तिकरण और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है। साथ ही खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सहयोगी संस्थाएँ अपनी विशेषज्ञता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करेंगी। कुछ संस्थाएँ प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार में मदद करेंगी, कुछ जल संरक्षण और सामुदायिक प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देंगी, जबकि अन्य संस्थाएँ कृषि नवाचार, एग्रीटेक समाधान, डिजिटल प्लेटफॉर्म, किसान प्रशिक्षण, बाजार संपर्क, मूल्य संवर्धन, जलवायु अनुकूल तकनीकों और अनुसंधान आधारित कृषि मॉडल विकसित करने में विभाग के साथ कार्य करेंगी।
इन संस्थाओं के साथ विकसित यह साझेदारी राजस्थान में कृषि विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगी। विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुँचेगा, आधुनिक तकनीकों का तेजी से प्रसार होगा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि व्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। यह पहल प्रदेश में कृषि नवाचार, प्राकृतिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी.