राजसमंद में श्रीमद्भागवत कथा: भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम
भगवती कृष्ण महाराज का संदेश
राजसमंद में भगवती कृष्ण महाराज: हरिनाम सेवा ट्रस्ट भीलवाड़ा से आए कथा मर्मज्ञ भगवती कृष्ण महाराज ने कहा कि जब भक्त की आस्था अडिग, विश्वास मजबूत और हृदय पवित्र होता है, तो भगवान अपने भक्त के प्रति समर्पित हो जाते हैं। उन्होंने राजसमंद शहर के कुमावत समाज रूणपछोर चौकी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भक्त प्रहलाद, ध्रुव चरित्र और भगवान नृसिंह के अवतार जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया। कथा के दौरान भक्ति भजनों पर श्रद्धालु भावुक होकर झूम उठे और भक्ति रस में डूब गए।
ध्रुव चरित्र और जड़ भरत की कथा
ध्रुव चरित्र का महत्व: कथा में ध्रुव की अटूट भक्ति का उल्लेख करते हुए महाराज ने बताया कि उनकी भक्ति के कारण भगवान ने उन्हें स्थायी स्थान प्रदान किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को दृढ़ विश्वास और समर्पण के साथ भक्ति करने का संदेश दिया। जड़ भरत और राजा रहुगण के संवाद का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि जड़ भरत हर परिस्थिति में भगवान के नाम में लीन रहे और सांसारिक दुख-दर्द से प्रभावित नहीं हुए।
सती चरित्र और सृष्टि सृजन की कथा
सती चरित्र और ब्रह्मा की उत्पत्ति: कथा में सती चरित्र, अजामिल उपाख्यान और चतुःश्लोकी भागवत के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि भगवान ने नाभि कमल से ब्रह्मा की उत्पत्ति की और ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण किया। सती चरित्र के प्रसंग में शिव-पार्वती की मनमोहक झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
भक्ति भजनों का आनंद
भक्ति भजनों की प्रस्तुति: शुकदेव और राजा परीक्षित के संवाद के दौरान महाराज ने भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी, जिसमें “म्हारा सतगुरु आया आंगणिये…” और मीराबाई की भक्ति पर आधारित “ओ मीरा सत्संग में जाणो…” शामिल थे। भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कथा का आरंभ: कथा के प्रारंभ में महोत्सव समिति के प्रमुख जगदीश लाल बोहरा और अन्य सदस्यों ने व्यासपीठ पूजन एवं आरती कर कथा का शुभारंभ किया। इसके बाद भगवती कृष्ण महाराज ने संकीर्तन के साथ कथा का आरंभ किया। समिति सदस्य गोपाल बोहरा ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जा रही है। महोत्सव के तहत 6 जून को संगीतमय सुंदरकांड पाठ, 7 जून को भजन संध्या और 8 जून को कार्यक्रम का समापन होगा।