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राघव चड्ढा का भाजपा में शामिल होना: समर्थकों की प्रतिक्रिया और इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में गिरावट

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव किया है। उनके इस निर्णय से समर्थकों में निराशा देखने को मिली है, जिसके चलते उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में 24 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक की कमी आई है। जानें इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं और चड्ढा की पहचान युवाओं के बीच।
 

राघव चड्ढा का भाजपा में प्रवेश


नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव किया है। उनके इस निर्णय से उनके समर्थकों में निराशा देखने को मिली है, जिसके चलते उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में 24 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक की कमी आई है।

राजधानी की राजनीति में इस कदम ने आम आदमी पार्टी को झटका दिया है, क्योंकि चड्ढा के साथ छह अन्य राज्यसभा सांसद भी भाजपा में शामिल हुए हैं। पार्टी नेतृत्व अब अपने बचे हुए सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है।

चड्ढा का यह निर्णय पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा में था, खासकर जब उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया था। इसे अरविंद केजरीवाल और चड्ढा के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। उनके समर्थकों में इस फैसले को लेकर उत्साह की कमी नजर आई, जहां कुछ ने इसे अवसरवादी राजनीति कहा, वहीं अन्य ने इसे चड्ढा के नए राजनीतिक सफर की शुरुआत माना।

इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स में गिरावट
भाजपा में शामिल होने के बाद चड्ढा को सोशल मीडिया पर भी झटका लगा है। आंकड़ों के अनुसार, पार्टी बदलने के 24 घंटे के भीतर उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में 10 लाख से अधिक की कमी आई। शुक्रवार को उनके फॉलोअर्स की संख्या 1.46 करोड़ थी, जो शनिवार दोपहर तक घटकर 1.35 करोड़ रह गई।

एनसीपी नेता अनीश गावंडे ने दावा किया है कि इंस्टाग्राम पर चलाए गए जेन जी अनफॉलो अभियान के कारण यह गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट किसी को रातोंरात हीरो बना सकता है और फिर उसे जीरो भी।

युवाओं के बीच चड्ढा की पहचान
राघव चड्ढा ने पिछले कुछ वर्षों में युवाओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने ऐसे मुद्दों को उठाया जो आम लोगों और खासकर युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े थे।

इन मुद्दों में पितृत्व अवकाश, ट्रैफिक संकट, टेलीकॉम कंपनियों की डेली डेटा लिमिट, महंगे समोसे और गिग वर्कर्स के शोषण जैसे विषय शामिल थे। चड्ढा ने गिग वर्कर्स की समस्याओं को समझने के लिए एक दिन ब्लिंकइट डिलीवरी पार्टनर के तौर पर भी काम किया।

केंद्र सरकार ने बाद में डिलीवरी कंपनियों से अनिवार्य 10 मिनट डिलीवरी समयसीमा हटाने का निर्देश दिया, जिसे चड्ढा की मुहिम से जोड़ा गया। इस प्रकार, उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी जो आम लोगों की समस्याओं को समझता है।

राज्यसभा में भी उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया, जिससे पारंपरिक राजनीति और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच की दूरी कम होती दिखी। इसी कारण उन्हें नई पीढ़ी का पसंदीदा नेता माना जाने लगा। जब उन्हें आम आदमी पार्टी में राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया गया, तब भी सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आए थे।