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रजिया सुल्तान: भारत की पहली महिला शासक की अनकही कहानी

रजिया सुल्तान, भारत की पहली महिला शासक, ने अपने अद्वितीय व्यक्तित्व और साहस से इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने न केवल राजगद्दी संभाली, बल्कि युद्ध में भी भाग लिया। उनके शासनकाल में कई विकास कार्य हुए, और उनकी प्रेम कहानी भी चर्चित रही। जानें रजिया के संघर्ष और उनके अद्वितीय कार्यों के बारे में इस लेख में।
 

रजिया सुल्तान: एक अद्वितीय शासक


रजिया सुल्तान (Razia Sultan, 1205-1240) भारत की पहली महिला शासक थीं। जब दिल्ली में सल्तनत का शासन था, तब राजा अपनी बेगमों को महलों में बंद रखते थे। लेकिन रजिया ने न केवल राजगद्दी संभाली, बल्कि युद्ध में भी भाग लिया। उनके शासनकाल में सल्तनत का काफी विकास हुआ। चार साल के शासन में उन्होंने कई ऐसे कार्य किए, जो आज भी याद किए जाते हैं।


रजिया का अद्वितीय व्यक्तित्व

रजिया, सुल्तान शमसुद्दीन इल्तुतमिश की बेटी थीं। वह अपने तीन भाइयों में इकलौती बहन थीं, लेकिन उनमें सबसे प्रतिभाशाली मानी जाती थीं। उनका बचपन का नाम हफ्सा मोइन था। उन्हें रज़िया अल-दीन और जलालत उद-दिन रज़िया के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिता ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें सैन्य प्रशिक्षण दिया और प्रशासन के गुण सिखाए।


सिंहासन की लड़ाई

सुल्तान इल्तुतमिश ने अपने बड़े बेटे को उत्तराधिकारी घोषित किया था, लेकिन उसकी अल्पायु में मृत्यु हो गई। इसके बाद उन्होंने रजिया को अपना उत्तराधिकारी बनाया, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने एक महिला के शासन को स्वीकार नहीं किया। 1236 में उनके पिता के निधन के बाद, रजिया के भाई रुखुद्दीन फिरोज को सिंहासन पर बैठा दिया गया।


रुखुद्दीन फिरोज की बेवकूफी और अय्याशी के कारण रजिया ने आम जनता की मदद से फिर से राजगद्दी हासिल की। बाद में रजिया की मां और भाई की हत्या करवा दी गई। 10 नवंबर, 1236 को रजिया सुल्तान पहली मुस्लिम शासक के रूप में दिल्ली की शासक बनीं। उन्होंने राज्य में कुएं, नलकूप, सड़कें बनवाईं और कला-संस्कृति को बढ़ावा दिया।


प्रेम कहानी और संघर्ष

रजिया सुल्तान की प्रेम कहानी भी प्रसिद्ध है। उन्हें अपने गुलाम जमालुद्धीन याकूत से प्रेम हो गया था। याकूत रजिया को घोड़े की सवारी कराता था और वह रजिया का विश्वासपात्र था। रजिया ने उसे युद्ध में घोड़ों की जिम्मेदारी दी और घुड़साले का अधिकारी बनाया।


इस बीच, भटिंडा के गवर्नर इख्तिअर अल्तुनिया ने रजिया की खूबसूरती पर मोहित होकर दिल्ली पर हमला किया। इस हमले में याकूत की मृत्यु हो गई और रजिया को बंदी बना लिया गया। मौत के डर से रजिया ने अल्तुनिया से शादी करने का निर्णय लिया। बाद में, रज़िया के भाई मैज़ुद्दीन बेहराम शाह ने सिंहासन छीन लिया।


राजगद्दी वापस पाने के लिए रज़िया और अल्तुनिया ने बेहराम शाह से युद्ध किया, लेकिन हार गए। इसके बाद, दोनों दिल्ली छोड़कर भाग गए और 14 अक्टूबर 1240 को डाकुओं द्वारा उनकी मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि शादी के बाद भी रजिया अपने गुलाम प्रेमी याकूत से मोहब्बत करती रहीं।