×

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में चल रही स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में सभी सेना प्रमुखों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और संघर्ष के प्रभावों पर चर्चा की गई। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक में क्या निर्णय लिए गए और सरकार की रणनीति क्या है।
 

पश्चिम एशिया में चल रही स्थिति की समीक्षा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में सभी सेना प्रमुखों ने भाग लिया। रक्षा मंत्री की इस समीक्षा बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, डीआरडीओ के प्रमुख, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। यह बैठक उस समय आयोजित की गई जब क्षेत्र में संघर्ष जारी है, और सरकार घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है। युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है।


 


अमेरिकी युद्ध उप सचिव की भारत यात्रा


इस बीच, अमेरिकी युद्ध उप सचिव एलब्रिज कोल्बी भारत में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करने के लिए उपस्थित हैं। इससे पहले, सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की और आम जनता की खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित आवश्यकताओं की उपलब्धता का आकलन किया। आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक की अध्यक्षता की।




सीसीएस की बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के संघर्ष के प्रभावों से निपटने के लिए मंत्रियों और सचिवों का एक समूह गठित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष एक बदलती हुई स्थिति है और इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऐसे में नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।


 


आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर चर्चा


प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी सरकारी अंगों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि नागरिकों को न्यूनतम असुविधा का सामना करना पड़े। सीसीएस की बैठक में आवश्यक वस्तुओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मध्यम और दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्प, मध्य और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया और तात्कालिक तथा दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की गई। सीसीएस ने खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित आम जनता की आवश्यकताओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया।