रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ स्थापना दिवस पर की समीक्षा बैठक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के 68वें स्थापना दिवस पर एक समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने संगठन की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने सिंदूर ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ की भूमिका की सराहना की और प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण में डीआरडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका की बात की। राजनाथ सिंह ने निजी क्षेत्र के साथ सहयोग और नवाचार पर जोर दिया, यह बताते हुए कि वर्तमान युग में निरंतर विकास और सीखने की आवश्यकता है।
Jan 1, 2026, 17:59 IST
डीआरडीओ स्थापना दिवस पर समीक्षा बैठक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में डीआरडीओ भवन में आयोजित स्थापना दिवस के अवसर पर एक समीक्षा बैठक की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सिंदूर ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो संगठन की व्यावसायिकता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करने के लिए डीआरडीओ की सराहना की, यह बताते हुए कि ऑपरेशन के दौरान उपकरणों ने निर्बाध रूप से कार्य किया, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।
प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण पर डीआरडीओ की भूमिका
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर घोषित सुदर्शन चक्र की स्थापना में डीआरडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत, डीआरडीओ अगले दशक में हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणाली से लैस करने का कार्य करेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायु रक्षा के महत्व को समझा गया है, और मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को जल्द पूरा करेगा।
डीआरडीओ की प्रगति और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग
राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह न केवल प्रौद्योगिकी का निर्माता है, बल्कि विश्वास का भी स्रोत है। उन्होंने निजी क्षेत्र के साथ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, यह बताते हुए कि उद्योग, शिक्षा और स्टार्टअप्स के साथ जुड़ाव से एक समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने अपनी प्रणालियों और प्रक्रियाओं में सुधार किया है, जिससे कार्य को अधिक प्रभावी और तेज बनाया जा सके।
तकनीकी विकास और नवाचार पर जोर
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से आग्रह किया कि वह तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ तालमेल बिठाते हुए प्रासंगिक उत्पाद विकसित करता रहे। उन्होंने नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से न केवल राष्ट्र की क्षमताओं में वृद्धि होगी, बल्कि रक्षा तंत्र भी मजबूत होगा।
विज्ञान और निरंतर विकास का महत्व
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि वर्तमान युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सीखने का युग है। उन्होंने बताया कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और नए युद्ध क्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं, जिससे हमें सीखने की प्रक्रिया को कभी समाप्त नहीं मानना चाहिए। हमें हमेशा खुद को चुनौती देते रहना चाहिए ताकि नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त हो सके।