रक्षा उत्पादन में सुरक्षा मानकों के सुधार की आवश्यकता
सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन
रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत रक्षा उत्पादन विभाग के एक उच्च अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद के निर्माण में सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का मुख्य कारण नियमों की कमी नहीं है, बल्कि मौजूदा मानकों का सही तरीके से पालन न करना है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को केवल कम करने के बजाय उन्हें पूरी तरह से समाप्त करना आवश्यक है। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने विस्फोटक और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में सुरक्षा नियमों के पालन को बेहतर बनाने और मानवीय निगरानी पर निर्भरता को कम करने के लिए तकनीक के अधिक उपयोग पर जोर दिया।
पुणे में आयोजित ‘सैन्य विस्फोटक सामग्री - सुरक्षा, अनुपालन और गुणवत्ता आश्वासन, रक्षा उत्पादन’ पर एक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने हाल के वर्षों में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और निजी उद्योगों में हुई कई दुर्घटनाओं के बाद इस कार्यक्रम का आयोजन किया। उन्होंने कहा, ‘‘इन हादसों के बाद हमें यह समझ में आया कि समस्या सही मानकों की कमी नहीं है, बल्कि उन मानकों को ईमानदारी से लागू न करना है। जब लोग लंबे समय तक काम करते हैं, तो वे अक्सर लापरवाह हो जाते हैं और प्रक्रियाओं को हल्के में लेने लगते हैं।’’
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्घटनाओं की जांच के लिए गठित समिति ने पाया कि सुरक्षा मानक और उपाय पहले से मौजूद हैं, लेकिन उन्हें लागू करने में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विस्फोटक सामग्री से जुड़ी दुर्घटनाओं से अपूरणीय जनहानि होती है, इसलिए इन्हें हर हाल में रोकना चाहिए। रक्षा उत्पादन सचिव ने सुझाव दिया कि विस्फोटक सामग्री और गोला-बारूद बनाने वाली इकाइयों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन बेहतर करने और मानवीय निगरानी पर निर्भरता घटाने के लिए तकनीक जैसे सेंसर, सीसीटीवी कैमरे, ‘ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग सिस्टम’ और ‘डेटा एनालिटिक्स’ का अधिक उपयोग किया जाए। आईएएस अधिकारी ने उद्योग से केवल गोला-बारूद के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय महत्वपूर्ण कच्चे माल जैसे प्रोपेलेंट के उत्पादन में निवेश करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘देश में प्रोपेलेंट की कमी है। हम केवल मौजूदा निर्माताओं से इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन देश में प्रोपेलेंट उत्पादन क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं कर रहे हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि पहले रक्षा उत्पादन विभाग में 19 हितधारकों के साथ बातचीत होती थी, लेकिन पिछले महीने इसे घटाकर केवल तीन कर दिया गया है, जिससे मंज़ूरी मिलने में लगने वाला समय तीन से छह माह से घटकर एक महीने से भी कम हो जाएगा।