योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर दान हेराफेरी के आरोपों पर विपक्ष को किया आड़े हाथों
मुख्यमंत्री का विपक्ष पर हमला
अयोध्या में राम मंदिर के लिए दान में हेराफेरी के आरोपों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष की आलोचना की और इसे भारत की आस्था पर हमला करार दिया। उन्होंने विधानसभा में समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के व्यवहार को अलोकतांत्रिक और शर्मनाक बताया। योगी ने कहा कि सदन की कार्यप्रणाली नियमों और परंपराओं के अनुसार चलती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के नियम 59 के तहत, किसी ट्रिब्यूनल या आयोग के पास लंबित मुद्दों पर चर्चा नहीं की जा सकती।
विपक्ष का व्यवहार और SIT की रिपोर्ट
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में, यदि अध्यक्ष को लगता है कि चर्चा से जांच प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी, तो अनुमति दी जा सकती है। समाजवादी पार्टी ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में यह आश्वासन दिया था कि वे जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, उनके लिए नोटिस देंगे। अयोध्या राम मंदिर का मामला अदालत में लंबित है। इस गंभीर मामले के बावजूद, विपक्ष ने सदन का अपमान किया और अदालत की प्रक्रिया का भी उल्लंघन किया।
उन्होंने यह भी कहा कि जिनका मुख्य उद्देश्य हंगामा करना है, उन्हें लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता। वे संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं। अयोध्या मामले में चंदा चोरी का आरोप लगाना गलत है; यह मामला चढ़ावे से संबंधित था। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर SIT की मांग की है। ट्रस्ट एक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जिसे कोर्ट द्वारा स्थापित किया गया है।
योगी ने बताया कि 23 जून को SIT ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके बाद 25 जून को FIR दर्ज की गई। FIR के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने मामले की निगरानी शुरू कर दी है। इस मामले में किसी संत या साधु की भूमिका नहीं पाई गई। मंदिर परिसर में 1100 से अधिक लोग काम कर रहे हैं, जिनमें से केवल आठ की भूमिका संदिग्ध पाई गई। संतों और साधुओं को बदनाम करना बेहद चिंताजनक है।