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योगी आदित्यनाथ ने कृषि सम्मेलन में प्रौद्योगिकी और सुधारों पर जोर दिया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्होंने कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया और कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थिति में सुधार की बात की। सम्मेलन में धान के उत्पादन में वृद्धि और किसानों की सफलता की कहानियों का भी उल्लेख किया गया। यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का महत्व

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ एक क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी, संस्थागत सुधारों और जमीनी स्तर पर भागीदारी के महत्व पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल नीतियों का निर्माण नहीं, बल्कि उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत में विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं और यदि इन क्षेत्रों में सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाएं, तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। प्रयोगशाला से सीधे खेतों तक पहुंचने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है।


कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थिति

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि भारत के पास पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार ऐसे प्रयासों का नेतृत्व करती है, तो राज्य सरकारें भी उनका अनुसरण करती हैं। किसानों को अवसर प्रदान करना आवश्यक है, क्योंकि वे परिणाम देने के लिए सक्षम हैं। 2017 में कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की स्थिति पर चर्चा करते हुए, उन्होंने बताया कि उस समय 69 केंद्र थे और कई बंद होने के कगार पर थे।


कृषि विकास दर में वृद्धि

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके अनुभव के अनुसार, पहले कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के सभी केंद्रों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। आजकल, वैज्ञानिक किसानों के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। स्वतंत्रता के बाद से कृषि क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में योगदान लगातार घटता रहा है, लेकिन अब प्रौद्योगिकी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


किसानों की सफलता की कहानियाँ

मुख्यमंत्री ने धान के उत्पादन में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अब 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाते हुए लागत को कम करना है। उन्होंने किसान राम शरण वर्मा का उदाहरण दिया, जो केवल 10वीं कक्षा पास हैं, लेकिन खेती में महारत हासिल करने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पहले जिन क्षेत्रों में केवल एक फसल होती थी, अब वहां तीन फसलें उगाई जा रही हैं। पहले किसानों को मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त संपर्क सूत्र नहीं मिलते थे।