×

यूपी में स्मार्ट मीटर प्रणाली में बदलाव: प्रीपेड की अनिवार्यता समाप्त

उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने यह आदेश जारी किया है, जिससे अब उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार स्मार्ट मीटर का चयन कर सकते हैं। इस निर्णय का स्वागत करते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे अपनी जीत बताया है। इसके अलावा, ऊर्जा विभाग ने गर्मियों में बिजली की मांग को देखते हुए वितरण व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए हैं। जानें इस बदलाव का उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा और आगे की योजनाएं क्या हैं।
 

यूपी में बिजली व्यवस्था में नया बदलाव


लखनऊ। यूपी में बिजली वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, और केवल स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने इस संबंध में आदेश जारी किया है, जो एक अप्रैल को अधिसूचित किया गया था। प्रदेश में लगभग 78 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित हैं, जिनमें से 70 लाख प्रीपेड मीटर हैं। पावर कार्पोरेशन नए विद्युत कनेक्शन के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर का उपयोग कर रहा है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता का विरोध किया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संसद में कहा कि प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं हैं और यह उपभोक्ताओं की पसंद पर निर्भर करता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने बताया कि राष्ट्रीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं के परिसर पर पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में मीटर लगाने की बात कही गई थी।

हालांकि, अधिकांश उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे थे, जिससे उपभोक्ता परिषद ने लगातार विरोध किया। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने एक अप्रैल 2026 को नई अधिसूचना जारी की है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि जहां भी संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के रूप में दिए जाएंगे। प्रीपेड की अनिवार्यता को हटा दिया गया है, और स्मार्ट मीटर के रूप में कनेक्शन दिए जाएंगे, लेकिन प्रीपेड मोड उपभोक्ताओं की इच्छा पर निर्भर करेगा।

उपभोक्ता परिषद की जीत- वर्मा
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि संशोधित अधिसूचना जारी हो गई है। देशभर के विद्युत उपभोक्ताओं ने यह लड़ाई जीती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपने आदेश में संशोधन किया है, जिससे अब पूरे देश में स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं, लेकिन प्रीपेड मोड केवल उपभोक्ताओं की सहमति पर ही लागू होगा।

विद्युत वितरण व्यवस्था को सुधारने के निर्देश
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. आशीष कुमार गोयल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। इसलिए विद्युत वितरण लाइनों की ट्रिपिंग को रोकने के प्रयास किए जाने चाहिए और पारेषण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा जाए।

शक्ति भवन में सोमवार को ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए गए कि पारेषण के सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएं। उन्होंने सभी अधिकारियों को आगामी शनिवार से 14 अप्रैल तक उपकेंद्रों में किए गए अनुरक्षण कार्यों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया। गोयल ने स्पष्ट किया कि गर्मियों में ट्रिपिंग नहीं होनी चाहिए। यदि ट्रांसमिशन लाइनों की ट्रिपिंग के कारण विद्युत आपूर्ति में बाधा आती है, तो अधीक्षण और मुख्य अभियंताओं पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने डिवीजन और जोन-वार डेटा मंगाकर विश्लेषण करने को भी कहा। फायर फाइटिंग की मॉक ड्रिल कराने और उपकेंद्रों व ट्रांसफार्मर की एजिंग एनालिसिस कर आवश्यक अनुरक्षण पर विचार करने को भी कहा।

निजीकरण विरोधी आंदोलन को देंगे धार
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को तेज करने की योजना बनाई है। अंतिम निर्णय रविवार को होने वाली केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने अभी तक निजीकरण प्रस्ताव को रद्द करने की घोषणा नहीं की है। विरोध करने वालों के खिलाफ उत्पीड़न जारी है। समिति ने प्रबंधन पर कई अन्य आरोप भी लगाए हैं, जिनमें संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी शामिल है।