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यूपी में कुत्ते की पूजा: भैरव बाबा मंदिर की अनोखी कहानी

यूपी के चिपियाना बुजुर्ग गांव में भैरव बाबा मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की मूर्ति की पूजा की जाती है। यहां की मान्यता है कि कुत्ते के काटने पर तालाब में स्नान करने से राहत मिलती है। इस मंदिर की कहानी 150 साल पुरानी है, जिसमें एक खानाबदोश और उसके कुत्ते की दिलचस्प दास्तान है। जानें इस अनोखी पूजा के पीछे का रहस्य और श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र कैसे बना यह स्थान।
 

कुत्ते की पूजा का अनोखा मामला


भारत में विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग निवास करते हैं, और यहां कई जातियां किसी न किसी को देवता मानती हैं। यूपी के ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चिपियाना बुजुर्ग गांव में एक ऐसा मामला सामने आया है जो आपको चौंका देगा। यहां भैरव बाबा मंदिर के प्रांगण में एक कुत्ते की मूर्ति है, जो लोगों की आस्था का केंद्र बन चुकी है। मान्यता है कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया हो, तो उसे मंदिर के पास स्थित तालाब में स्नान करने से राहत मिलती है।


इस मंदिर की मान्यता इतनी प्रबल है कि लोग दूर-दूर से यहां कुत्ते की मूर्ति की पूजा करने आते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति, लाखा बंजारे, ने अपने कुत्ते की मृत्यु के बाद उसे यहीं दफनाया था, जिसके बाद गांव वालों ने कुत्ते की कब्र पर एक मंदिर का निर्माण किया।


जादुई तालाब की मान्यता


चिपियाना गांव में भैरव मंदिर के पास स्थित कुत्ते की समाधि की कहानी भी दिलचस्प है। यहां एक तालाब है, जिसमें स्नान करने से कुत्ते के काटने का असर कम हो जाता है। हर शनिवार यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से रेबीज का प्रभाव भी कम हो जाता है। मंदिर के बाहर एक कुंड भी है, जहां लोग स्नान कर सकते हैं।


कहानी का रहस्य


ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 150 साल पहले, लाखा नाम के एक खानाबदोश ने अपने कुत्ते के लिए एक मकबरा बनवाया था। यह कहानी इस प्रकार है कि लाखा ने एक व्यापारी से पैसे उधार लिए थे और समय पर चुकता न कर पाने के कारण अपने कुत्ते को गिरवी रख दिया। एक दिन व्यापारी के घर चोरी हो गई, लेकिन कुत्ते ने न तो भौंका और न ही अपने मालिक को जगाया। जब व्यापारी को चोरी का पता चला, तो उसने कुत्ते पर गुस्सा किया। लेकिन कुत्ता अपने मालिक को चोरी का सामान दिखाने ले गया। व्यापारी ने कुत्ते को आज़ाद किया, लेकिन लाखा ने गुस्से में आकर कुत्ते को गोली मार दी। पश्चाताप के प्रतीक के रूप में लाखा ने भैरव बाबा मंदिर में कुत्ते के लिए समाधि बनवाई।