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यूके में भारतीय कंपनियों का तेजी से विस्तार: रेवेन्यू और रोजगार में वृद्धि

ग्रांट थॉर्नटन यूके की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष यूके में भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारतीय व्यवसायों का कुल रेवेन्यू 105 बिलियन पाउंड से अधिक हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय कंपनियों ने रोजगार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे 203,549 लोगों को रोजगार मिला है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खास है और कैसे यह दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है।
 

भारतीय व्यवसायों का यूके में उभार

ग्रांट थॉर्नटन यूके द्वारा जारी की गई 'इंडिया मीट्स ब्रिटेन ट्रैकर' रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष यूके में भारतीय व्यवसायों का विस्तार उल्लेखनीय रूप से हुआ है। भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत बढ़कर 1,912 हो गई है, जबकि इनका कुल रेवेन्यू 105 बिलियन पाउंड से अधिक पहुंच गया है। 2025 में यह आंकड़ा 72.14 बिलियन पाउंड था।


रिपोर्ट का महत्व

यह रिपोर्ट कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और इंडिया ग्लोबल फोरम (IGF) के सहयोग से तैयार की गई है। यह यूके में तेजी से बढ़ते भारतीय व्यवसायों की गतिविधियों का विश्लेषण करती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में भारत और यूके के बीच द्विपक्षीय व्यापार 47.4 बिलियन पाउंड तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है।


सीटा का प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, 'व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता' (CETA) के लागू होने के बाद, व्यापार नियमों में सरलता आई है, जिससे सीमा पार निवेश को बढ़ावा मिला है। इस साल 66 कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक रेवेन्यू वृद्धि दर्ज की है।


रोजगार में वृद्धि

भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों ने यूके में रोजगार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब ये कंपनियां 203,549 लोगों को रोजगार देती हैं, जो 60.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर ब्रिटेन में सबसे बड़ी भारतीय रोजगार देने वाली कंपनी बनी हुई है।


व्यापार का विस्तार

लंदन भारतीय व्यवसायों के लिए एक प्रमुख स्थान बना हुआ है, लेकिन अब निवेश पूरे देश में फैल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लंदन में भारतीय स्वामित्व वाली कंपनियों का हिस्सा 38 प्रतिशत है।


भविष्य की संभावनाएं

CII के प्रवक्ता ने कहा कि व्यापार समझौते ने पहले ही निवेश गतिविधियों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। जैसे ही यह कानून बनेगा, भारतीय कंपनियों की रुचि और बढ़ेगी।