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यासीन मलिक का चौंकाने वाला हलफनामा: सरला भट हत्या मामले में नई जानकारी

यासीन मलिक, जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख, ने सरला भट हत्या मामले में अदालत में एक महत्वपूर्ण हलफनामा पेश किया है। इस हलफनामे में उन्होंने न केवल अपनी भूमिका से इनकार किया है, बल्कि मुकदमे का बचाव न करने का निर्णय भी लिया है। मलिक ने अदालत से मृत्युदंड पर विचार करने का अनुरोध किया है, जो इस मामले को और जटिल बनाता है। उनका यह कदम कानूनी और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। आगे की सुनवाई 19 सितंबर 2026 को होगी, जिससे यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस हलफनामे को कैसे स्वीकार करती है।
 

यासीन मलिक का बयान

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के नेता यासीन मलिक ने 1990 में हुए सरला भट हत्या मामले में श्रीनगर की अदालत में एक महत्वपूर्ण हलफनामा पेश किया है। तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने 25 पन्नों का यह हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि वह अब इस मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया को चुनौती नहीं देना चाहता और अदालत उसके लिए मृत्युदंड पर विचार कर सकती है। हालांकि, उसने इस हलफनामे में सरला भट की हत्या में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है.


सरला भट हत्या का मामला

यह मामला 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या से संबंधित है, जो उस समय जम्मू-कश्मीर में बढ़ती हिंसा के बीच हुआ था। कई वर्षों बाद, जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने मामले की फिर से जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। यासीन मलिक का नाम भी इस मामले में सामने आया है, लेकिन उसने अपने हलफनामे में आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका इस हत्या से कोई संबंध नहीं है।


मुकदमा न लड़ने का निर्णय

यासीन मलिक का यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने मुकदमे का बचाव न करने का निर्णय लिया है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उसने सरला भट की हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, उसने स्पष्ट किया है कि उसके द्वारा मुकदमे को आगे चुनौती न देने का निर्णय अभियोजन पक्ष के आरोपों या अपराध स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


निर्णय के पीछे का कारण

मलिक ने अपने हलफनामे में कहा है कि उसने यह निर्णय सोच-समझकर लिया है और उसने 'इस्तिखारा' प्रार्थना का भी उल्लेख किया है। वह अदालत या जांच एजेंसियों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं कर रहा है, लेकिन खुद को इस मामले में गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा कर रहा है।


यासीन मलिक का पूर्व रुख

यह पहली बार नहीं है जब यासीन मलिक ने किसी मामले में आरोपों का सक्रिय रूप से बचाव नहीं करने का निर्णय लिया है। मई 2022 में, दिल्ली की विशेष NIA अदालत में आतंकवाद से जुड़े वित्तपोषण मामले में भी उसने आरोपों को चुनौती नहीं दी थी। वर्तमान में, वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।


व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख

यासीन मलिक ने अपने हलफनामे में केवल कानूनी मुद्दों का ही जिक्र नहीं किया है, बल्कि उसने अपनी पत्नी मुस्हाल हुसैन मलिक से तलाक लेने के फैसले का भी उल्लेख किया है। उनकी शादी 2009 में हुई थी, और मलिक ने लंबे समय से परिवार से संपर्क न होने का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है।


आगे की प्रक्रिया

यासीन मलिक का हलफनामा अदालत के सामने उसका पक्ष प्रस्तुत करता है, लेकिन केवल इसके आधार पर मृत्युदंड तय नहीं हो जाता। अदालत को उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया, आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना होगा। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर 2026 को होनी है।


महत्वपूर्ण बिंदु

यासीन मलिक का यह हलफनामा इसलिए चर्चा में है क्योंकि वह सरला भट मामले में अपनी भूमिका से इनकार कर रहा है, जबकि दूसरी ओर मुकदमे का बचाव न करने और अपने लिए मृत्युदंड की मांग कर रहा है। यह विरोधाभास इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।