मौलाना अरशद मदनी ने आरएसएस की प्रशंसा की, असम के मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने नई दिल्ली में आरएसएस की आम बैठक में इसकी प्रशंसा की। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करते हुए कहा कि वे आरएसएस के खिलाफ नहीं हैं। इसके अलावा, उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें मुसलमानों के खिलाफ नीतियों का आरोप शामिल है। मदनी ने एनआरसी और मदरसों की सुरक्षा पर भी अपने विचार साझा किए। इस लेख में उनके विचारों और आरोपों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
Aug 29, 2025, 12:39 IST
आरएसएस की आम बैठक में मौलाना मदनी का बयान
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आम बैठक में इसकी सराहना की। उन्होंने आरएसएस की शताब्दी के अवसर पर एक समिति के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे सकारात्मक रूप से लिया जाना चाहिए। मदनी ने कहा कि यदि हिंदू-मुस्लिम एकता की बात है, तो वे आरएसएस के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने बताया कि लगभग आठ साल पहले उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की थी और उन्हें भी यही संदेश दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि बाद में ऐसा कोई अवसर नहीं आया, लेकिन अगर फिर से मौका मिला, तो वे मिलेंगे।
व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक विवादों पर विचार
व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक विवादों पर रुख
तीन बच्चों के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मदनी ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी इच्छा से निर्णय लेने का अधिकार है। धार्मिक स्थलों पर शिवलिंगों की प्राप्ति को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कहा कि जमीयत का दृष्टिकोण 1991 के पूजा स्थल अधिनियम पर आधारित है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आज़ादी के बाद सांप्रदायिक ताकतों ने मुसलमानों के खिलाफ जगह बनाई, और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसका विरोध किया। मदनी ने कहा, "हमारी लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि उस सरकार से है जो सांप्रदायिक तत्वों को बढ़ावा देती है। सड़कों पर होने वाली झड़पें देश को नुकसान पहुँचाएंगी।
असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर हमला
मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरमा ने कांग्रेस के साथ राजनीतिक लाभ उठाया है, लेकिन आरएसएस की मानसिकता को बनाए रखा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सरमा को टिकट न देने का अनुरोध किया था, लेकिन कांग्रेस ने उनकी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। मदनी ने आरोप लगाया कि सरमा ने असम की नीतियों को नुकसान पहुँचाया है और लगभग 50,000 मुसलमानों को विस्थापित किया है, जबकि हिंदू आबादी को सुरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि जमीयत इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की योजना बना रही है।
एनआरसी और कानूनी लड़ाई
एनआरसी और कानूनी लड़ाई
जमीयत के प्रमुख ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के तहत नागरिकता के लिए 1971 के कटऑफ वर्ष को बदलने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जमीयत ने इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है।
मदरसों की सुरक्षा के लिए जमीयत के प्रयास
मदरसों की सुरक्षा के लिए जमीयत के प्रयास
मदनी ने मदरसों की सुरक्षा के लिए जमीयत के कानूनी प्रयासों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया है, जहाँ यह मामला चल रहा है। उन्होंने कहा कि हम हर मुद्दे पर अदालत जाने से बचते हैं, लेकिन यदि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो हम चुप नहीं रहेंगे।