मोहन भागवत ने Gen Z के विरोध पर दी प्रतिक्रिया, शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता
RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z के बढ़ते विरोध पर अपनी राय व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी चिंताएँ उचित हैं। उन्होंने भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि लोकतंत्र में विरोध का महत्व है। भागवत ने नई पीढ़ी की ईमानदारी और देशभक्ति की अपील की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सिस्टम में सुधार होना चाहिए, न कि किसी के खिलाफ। उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि वे युवाओं की आकांक्षाओं और नीयत पर भरोसा करते हैं।
Aug 6, 2026, 19:23 IST
Gen Z के विरोध पर RSS प्रमुख की टिप्पणी
देश के विभिन्न हिस्सों में पेपर लीक के खिलाफ नई पीढ़ी के बढ़ते विरोध के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि उनकी चिंताएँ उचित हैं और भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। हाल ही में छात्रों के प्रदर्शनों और उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी' कहे जाने पर भागवत ने कहा कि यदि Gen Z विरोध कर रही है, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं। वे हमारी अगली पीढ़ी हैं। मुझे नहीं लगता कि Gen Z ऐसी है। मुझे विश्वास है कि नई पीढ़ी - Gen Z और Gen Alpha - हमारी मौजूदा पीढ़ी से अधिक ईमानदार है, और देशभक्ति व सेवा की सच्ची अपील उन पर प्रभाव डालती है।
लोकतंत्र में विरोध का महत्व
भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति बनाने का एक तरीका विरोध भी है। विभिन्न विचार सामने आते हैं और बातचीत के माध्यम से सहमति बनती है। यदि विभिन्न कारणों से बात नहीं सुनी जाती, तो आंदोलन किया जा सकता है। लेकिन यह सहमति बनाने के लिए होना चाहिए, न कि विभाजन के लिए। Gen Z की शिकायतें सही हैं, और भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, इसलिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है। हमें सच में बातचीत करनी चाहिए। जब हम उनकी उम्र के थे, तो हम बड़े लोगों की बात मान लेते थे, कभी सवाल नहीं उठाते थे।
Gen Z की सोच और सवाल पूछने की प्रवृत्ति
उन्होंने आगे कहा कि अब, Gen Z और Gen Alpha सवाल पूछते हैं, उन्हें तार्किक उत्तर और प्यार चाहिए। लोकतंत्र में यही तरीका है। इसे अंग्रेज़ी में 'डिबेट' कहते हैं, जबकि हम इसे 'शास्त्रार्थ' कहते हैं। यहाँ कोई बहस नहीं होती, बल्कि दो पक्ष होते हैं: 'पूर्व' और 'उत्तर'। सभी पहलुओं को देखने से हर किसी का अपना दृष्टिकोण सामने आता है, जिससे सच्चाई की पूरी तस्वीर बनती है। ऐसा होना चाहिए।
विरोध का सही तरीका
भागवत ने कहा कि मैं यह नहीं कहूँगा कि Gen Z को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने और काम करने के कुछ तरीके होते हैं। संविधान निर्माताओं और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के भाषणों में इस पर संकेत दिए गए हैं। हमें यह देखना चाहिए कि Gen Z विरोध कर रही है क्योंकि उन्हें कुछ समस्याएँ हैं, और उन्हें हल किया जाना चाहिए। आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम को सुधारने के लिए होना चाहिए।
युवाओं पर भरोसा
एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि उन्हें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हालिया टकराव के बारे में सही जानकारी नहीं है, लेकिन युवाओं पर उनका विश्वास अडिग है। उन्होंने कहा कि मैं Gen Z पर आँख बंद करके भरोसा करूँगा। उन्हें देश के युवाओं की नीयत और आकांक्षाओं पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यावसायिक व्यवसाय नहीं है। समुदाय की मदद से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। शिक्षा का आर्थिक बोझ बहुत अधिक है। हमें सतर्क और सक्रिय रहने की आवश्यकता है और सिस्टम का नियमित रूप से आकलन करना होगा। हमें अपने शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। शिक्षा देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है।