मोहन भागवत का संदेश: संघर्षों का समाधान एकता और अनुशासन में है
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक सभा में कहा कि स्वार्थ और वर्चस्व की चाह संघर्षों का मुख्य कारण है। उन्होंने स्थायी शांति के लिए एकता, अनुशासन और धर्म के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी लोग आपस में जुड़े हुए हैं। उन्होंने आचरण के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता।
Mar 20, 2026, 12:46 IST
संघर्षों का मूल कारण और समाधान
आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि स्वार्थ और वर्चस्व की चाह विश्व में संघर्षों का मुख्य कारण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही संभव है। नागपुर में आयोजित एक सभा में भागवत ने कहा कि पिछले 2000 वर्षों में दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के लिए कई विचारों का प्रयोग किया है, लेकिन सफलता बहुत कम मिली है। धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और श्रेष्ठता की धारणाएं आज भी समाज में विद्यमान हैं।
भागवत विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा यह सिखाती है कि "सभी आपस में जुड़े हुए और एक हैं"। उन्होंने संघर्षों को समाप्त कर सद्भाव और सहयोग की दिशा में बढ़ने का आह्वान किया। भागवत ने यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान भी इसी समझ की ओर अग्रसर हो रहा है।
आरएसएस प्रमुख ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी परिलक्षित होना चाहिए। उन्होंने बताया कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है, जिसमें व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ सकता है। भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है, जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की आवश्यकता है।