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मोदी सरकार ने एलपीजी और एटीएफ की कीमतों में वृद्धि की, हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना

मोदी सरकार ने हाल ही में एलपीजी और एटीएफ की कीमतों में वृद्धि की है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है। यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच लिया गया है। जबकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

एलपीजी और एटीएफ की कीमतों में वृद्धि

पांच राज्यों में मतदान समाप्त होने के दो दिन बाद, मोदी सरकार ने एलपीजी की कीमतों में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ यानी विमान ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है। यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच लिया गया है।




सरकारी तेल कंपनियों, जैसे कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखा है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। इसके विपरीत, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में औसतन 993 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की नई कीमत 3071.50 रुपये हो गई है। घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर रखी गई है, जिससे आम रसोई उपयोगकर्ताओं को राहत मिली है।


 


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इसी क्रम में, अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दिल्ली में इसकी कीमत अब 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब विमान ईंधन महंगा हुआ है, क्योंकि एक अप्रैल को इसमें लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। हालांकि, घरेलू विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरेलू यात्रियों पर तत्काल प्रभाव सीमित रखने की कोशिश की गई है।




इस वृद्धि का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन का मुख्य मार्ग है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर अब विभिन्न ईंधनों की कीमतों में दिखाई दे रहा है।




इसके साथ ही, मोदी सरकार ने अप्रत्याशित लाभ कर में भी कटौती की है ताकि निर्यात क्षेत्र पर दबाव कम किया जा सके। डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 55.5 रुपये प्रति लीटर था। वहीं एटीएफ पर यह कर 42 रुपये से घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य रखा गया है। इसके साथ ही, डीजल के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर को भी इस पखवाड़े के लिए शून्य कर दिया गया है।


 


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यह ध्यान देने योग्य है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की शुरुआत में एलपीजी कीमतों की समीक्षा करती हैं। अप्रैल में भी कीमतों में वृद्धि हुई थी, जब घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर में 196 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मार्च में भी 114.5 रुपये की वृद्धि हुई थी। ऐसे में मई में कीमतों में और वृद्धि की संभावना पहले से जताई जा रही थी।




इस बीच, सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि को लेकर कई भ्रामक संदेश तेजी से फैलने लगे। जिस पर सरकार ने तुरंत सफाई देते हुए इन दावों को पूरी तरह गलत बताया। तथ्य जांच इकाई ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और वायरल दस्तावेज फर्जी है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा है कि फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतों में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ डालने से बचने की कोशिश की जा रही है।




कुल मिलाकर, मोदी सरकार और तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देने और वैश्विक दबावों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। जहां एक ओर घरेलू उपभोक्ताओं को सीधे असर से बचाया गया है, वहीं वाणिज्यिक और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में लागत बढ़ने के संकेत साफ हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले समय में इसका व्यापक असर घरेलू बाजार और हवाई यात्रा दोनों पर देखने को मिल सकता है।