मोटापे और अल्जाइमर: नई स्टडी में महत्वपूर्ण संबंध का खुलासा
अल्जाइमर और मोटापे का संबंध
अल्जाइमर एक मस्तिष्क संबंधी बीमारी है, और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के कारण डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है। हाल ही में एक अध्ययन में यह सामने आया है कि मोटापा भी अल्जाइमर के विकास में योगदान कर सकता है। मोटापे के कारण मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है.
अध्ययन के निष्कर्ष
Molecular Neurodegeneration जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मोटापा अल्जाइमर की समस्या को बढ़ा सकता है। इस अध्ययन के शोधकर्ताओं, डॉक्टर स्टीफन वोंग और डॉक्टर ली यांग ने बताया कि शरीर में चर्बी के संचय से मस्तिष्क में फैट के अणु पहुंचकर अल्जाइमर की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। मोटापे के कारण शरीर के फैट टिश्यू में कुछ परिवर्तन होते हैं, जो मस्तिष्क के कार्यों को प्रभावित करते हैं.
अल्जाइमर को बढ़ाने वाले अणु
शोध में यह पाया गया कि Phosphatidylethanolamines (PEs) नामक फैट अणु अल्जाइमर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। मोटापे के कारण शरीर में PEs का स्तर बढ़ जाता है, जो छोटे कणों के रूप में मस्तिष्क तक पहुंचते हैं। इससे मस्तिष्क की इम्यून डिफेंस प्रणाली को नुकसान पहुंच सकता है, और एमिलॉयल प्रोटीन अल्जाइमर की पहचान के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे याददाश्त और सोचने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
मोटापा कम करने के उपाय
अल्जाइमर की समस्या से बचने के लिए मोटापे को कम करना आवश्यक है। वजन घटाने से मस्तिष्क में फैट से संबंधित समस्याएं कम हो सकती हैं। हेल्दी डाइट और नियमित व्यायाम के माध्यम से वजन कम किया जा सकता है.