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मेरठ में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण का मामला: जानें पूरी कहानी

मेरठ के कपसाड गांव में एक दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण की घटना ने गांव में तनाव का माहौल बना दिया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी पारस राजपूत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जबकि परिवार ने 48 घंटे के भीतर लड़की को बरामद करने की मांग की है। इस मामले में प्रेम-प्रसंग का भी जिक्र हो रहा है। जानें इस जटिल मामले की पूरी कहानी और स्थानीय राजनीति का प्रभाव।
 

मेरठ में तनाव का माहौल


मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड गांव में शुक्रवार को तनाव का माहौल बना रहा। यह स्थिति एक दिन पहले एक दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के कारण उत्पन्न हुई। हत्या का आरोप पारस राजपूत नामक युवक पर है, जो एक डॉक्टर के लिए काम करता है। पुलिस ने पारस और लड़की की खोज शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। परिवार ने पुलिस को 48 घंटे का समय दिया है, अन्यथा वे महिला के अंतिम संस्कार के लिए सहमत नहीं होंगे। इस मामले में प्रेम-प्रसंग की चर्चा भी हो रही है, क्योंकि अगवा लड़की को पारस की प्रेमिका बताया जा रहा है।


परिवार का बयान

इस मामले की सच्चाई तब सामने आएगी जब पुलिस पारस राजपूत को गिरफ्तार करेगी और लड़की को खोज निकालेगी। पारस के परिवार का कहना है कि वह नाबालिग है और लड़की बालिग है, और दोनों के बीच प्रेम संबंध थे। पहले भी उन्हें पकड़ा गया था, लेकिन पंचायत में समझौता कर दिया गया था।


गांव वालों के अनुसार, दोनों पिछले 2-3 साल से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच प्यार बढ़ गया था। हालांकि, लड़की के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। बताया जा रहा है कि लड़की की शादी कहीं और तय हो गई थी, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहती थी। इसी विवाद के चलते लड़की ने पारस को बुलाया, जिसके बाद यह घटना हुई।


लड़की के पिता का बयान

लड़की के पिता सतेंद्र ने बताया कि 8 जनवरी को वह खेत में गए थे। उनकी पत्नी और बेटी खेत की ओर जा रही थीं, तभी पारस ने उनकी बेटी से छेड़खानी की। इस दौरान पारस ने उनकी पत्नी पर जानलेवा हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसके बाद पारस बेटी को लेकर भाग गया। पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।


ग्रामीणों का आक्रोश

महिला की हत्या के बाद दलित समाज में आक्रोश फैल गया। लोग महिला के शव को घर के सामने रखकर प्रदर्शन करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई थानों की फोर्स तैनात की। जब एंबुलेंस शव लेने आई, तो ग्रामीणों ने उसमें तोड़फोड़ की। DM और SSP भी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे तब तक अंतिम संस्कार नहीं करने को तैयार नहीं हुए जब तक लड़की को बरामद नहीं किया जाता।


सपा विधायक का हस्तक्षेप

सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने कपसाड गांव जाने से रोक दिया, जिससे वह नाराज हो गए। उन्होंने धरना दिया और अपनी महिला कार्यकर्ताओं को गांव में जाने दिया। महिला कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर चूड़ियां फेंकीं। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की और पुलिस की कार्रवाई की निंदा की।


आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

SSP डॉ. विपिन ताडा के आदेश पर पारस राजपूत, उसके पिता और कुछ अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के मामले में विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। पुलिस की 10 टीमें लड़की और पारस की खोज में जुटी हैं।


मुआवजे की मांग

सपा विधायक अतुल प्रधान ने सरकार से पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और एक सरकारी नौकरी की मांग की है। उन्होंने पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये देने की भी घोषणा की। पुलिस और मृतक के परिवार के बीच सहमति बन गई है, लेकिन परिवार ने कुछ शर्तें रखी हैं, जिसमें 48 घंटे के भीतर आरोपी और लड़की को बरामद करना शामिल है। पूर्व विधायक संगीत सोम भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और कहा कि दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।