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मुरादाबाद में निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई, DM ने उठाए सख्त कदम

मुरादाबाद में जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने एनसीईआरटी पुस्तकों के पालन को अनिवार्य किया और स्कूलों को महंगी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डालने से रोका। इसके अलावा, 'पुस्तक माफिया' से सांठगांठ करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जानें इस बैठक में और क्या निर्देश दिए गए।
 

जिलाधिकारी का सख्त रुख

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने जनपदीय शुल्क नियामक समिति की बैठक में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 के अधिनियम और 2024 के सीबीएसई निर्देशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों को बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक में डीएम ने निर्देश दिए कि कक्षा 1 से 12 तक एनसीईआरटी पुस्तकों का पालन अनिवार्य किया जाए। विशेष रूप से कक्षा 1 से 8 के लिए अभिभावकों को महंगी, निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। स्कूलों को सस्ती पुस्तकों के विकल्प प्रदान करने होंगे.


पुस्तक माफिया पर कार्रवाई

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि कोई विद्यालय किसी विशेष दुकान से ड्रेस, जूते या किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाता है, तो इसे ‘पुस्तक माफिया’ से सांठगांठ माना जाएगा। इस व्यवस्था की पारदर्शिता की जांच के लिए एक विशेष जिला स्तरीय टीम का गठन किया गया है, जो अगले 15 दिनों में जिले के 63 स्कूलों के पिछले 3 वर्षों के रिकॉर्ड का गहन सत्यापन करेगी.


कड़ी सजा का प्रावधान

डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि नियमों के पहले उल्लंघन पर 1 लाख रुपये, दूसरी बार 5 लाख रुपये का अर्थदंड और तीसरी बार गलती दोहराने पर विद्यालय की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा, यदि किसी स्कूल ने निर्धारित मानकों से अधिक शुल्क लिया है, तो उसे चालू सत्र 2026-27 की फीस में समायोजित करना होगा या छात्र को वापस लौटाना होगा.


शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक

जिलाधिकारी ने प्रशासन की भावी रणनीति साझा करते हुए बताया कि शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए अधिकारियों और शिक्षकों की संयुक्त टीमें स्कूलों में जाएंगी। मुरादाबाद में ये टीमें न केवल वर्तमान शैक्षिक सत्र की पुस्तकों की स्थिति की जांच करेंगी, बल्कि ड्रेस और अन्य सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी निगरानी करेंगी.


शिक्षा का मानवीय पक्ष

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्कूल संचालकों को शिक्षा का मानवीय पक्ष समझाते हुए ‘क, ख, ग, घ’ की एक नई परिभाषा सिखाई। उन्होंने कहा कि “क” से कहानी और कल्पना, “ख” से खेल और खिलौने, “ग” से गीत और गतिविधियां, तथा “घ” से घनिष्ठता और घर जैसा माहौल होना चाहिए।


सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता

डीएम के अनुसार, विद्यार्थियों में सीखने की रुचि तभी विकसित होगी जब स्कूल उन्हें तनावमुक्त और रचनात्मक वातावरण प्रदान करेंगे। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी और जिला विद्यालय निरीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने अंत में दोहराया कि स्कूलों को निजी प्रकाशकों से दूरी बनाकर केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करना होगा.