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मुरादाबाद में अपहरण और हत्या के मामले में चार दोषियों को उम्रकैद की सजा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक नाबालिग बच्चे की हत्या के मामले में चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह मामला आठ साल पुराना है, जिसमें अपहरण के पीछे सट्टे का विवाद था। अदालत ने सभी दोषियों को कठोर सजा दी है, जबकि दो अन्य को बेकसूर मानते हुए केस से बरी कर दिया गया। जानें इस खौफनाक घटना की पूरी कहानी और न्याय की प्रक्रिया के बारे में।
 

मुरादाबाद में न्याय का कड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक आठ साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में न्यायालय ने सख्त निर्णय लिया है। अपर जिला जज (सप्तम) चंचल की अदालत ने एक नाबालिग बच्चे की क्रूर हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने इन चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक पर 75,000 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है.


घटना का विवरण

यह मामला मूंढापांडे थाना क्षेत्र का है, जहां मोहम्मद यामीन के 12 वर्षीय भांजे जीशान का अपहरण किया गया था। पुलिस जांच के दौरान चार आरोपियों, रशीद, उसके बेटे सुहेल, फैजान और फराज ने अपने अपराध को स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने जीशान का शव बरामद किया, जिसके बाद अदालत में पुख्ता चार्जशीट पेश की गई.


सट्टे के विवाद का सच

मुरादाबाद पुलिस की जांच में यह सामने आया कि इस हत्या का मुख्य कारण सट्टे के नंबरों को लेकर विवाद था। आरोपियों ने जीशान के मामा यामीन के भाई के बेटे को बंधक बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन जब वह नहीं मिला, तो उन्होंने जीशान का अपहरण कर लिया। किडनैपिंग के बाद, पुलिस के पकड़े जाने के डर से उन्होंने बच्चे की हत्या कर दी.


क्रूरता की हदें

इस मामले में शामिल अपराधियों की क्रूरता ने समाज को झकझोर दिया। जीशान की हत्या के बाद उसकी पहचान मिटाने के लिए कातिलों ने उसकी गर्दन काट दी और शव के हिस्सों को रामगंगा नदी में फेंक दिया ताकि कोई सुराग न मिले.


क्लीनचिट पाने वाले दो आरोपी

शुरुआत में जीशान के मामा यामीन ने मोहम्मद आमीर और मुरसलीन पर शक जताया था। लेकिन पुलिस की गहन जांच के बाद इन दोनों की संलिप्तता साबित नहीं हुई, और उन्हें बेकसूर मानते हुए केस से बरी कर दिया गया.