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मुजफ्फरनगर में दोहरे हत्याकांड में आरोपी को मिली फांसी की सजा

यूपी के मुजफ्फरनगर में एक दोहरे हत्याकांड में अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला एक अवैध संबंध के चलते मां और बेटे की हत्या से जुड़ा है। 2011 में हुई इस घटना ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। आरोपी ज़हूर हसन को 15 साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषी ठहराया गया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के फैसले के पीछे की वजहें।
 

मुजफ्फरनगर में दोहरे हत्याकांड का मामला


यूपी के मुजफ्फरनगर में एक दोहरे हत्याकांड से जुड़े मामले में अदालत ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला एक अवैध संबंध और महिला के साथ रहने की जिद के कारण उत्पन्न हुआ, जिसमें आरोपी ने एक मां और उसके बेटे की हत्या कर दी। यह घटना चरथावल कोतवाली क्षेत्र में हुई थी।


मां और बेटे के शव चरथावल के जंगलों से मिले थे। यह मामला 2011 में काफी चर्चित रहा और पिछले 15 वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में था। अंततः अदालत ने रईस (जिसे रहीस और ज़हूर हसन भी कहा जाता है) को दोषी ठहराया और उसे फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही, उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.


घटना का विवरण

यह घटना 2011 में बकरीद के दिन हुई, जब ज़हूर हसन ने सलेमपुर से राजेश देवी और उसके छह साल के बेटे को एक टेम्पो में बैठाया। आरोपी ने उन्हें चरथावल के एक गन्ने के खेत में ले जाकर धमकाया। जब राजेश देवी ने जाने की कोशिश की, तो ज़हूर ने उन पर हमला कर दिया।


उसने दोनों को बेहोश करने के बाद ईंट से कुचलकर उनकी हत्या कर दी और शवों को झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिस जांच में यह सामने आया कि ज़हूर का राजेश देवी के साथ अवैध संबंध था, और महिला उस पर साथ रहने का दबाव डाल रही थी।


राजेश देवी का घर छोड़ना

7 नवंबर 2011 को राजेश देवी ने यह कहकर घर छोड़ा कि वह रुड़की जा रही है। वह मुजफ्फरनगर के सलेमपुर गांव के सुरेश की पत्नी थी। जब वह वापस नहीं लौटी, तो सुरेश ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 13 नवंबर को दोनों के शव जंगलों से बरामद हुए।


पुलिस ने मामले की जांच तेज की और परिवार के सदस्यों से पूछताछ की। जांच के दौरान रईस उर्फ ज़हूर हसन का नाम सामने आया, जो बरेली जिले के परबहाउद्दीनपुर गांव का निवासी था।


गिरफ्तारी और सुनवाई

पुलिस ने रईस का नाम सामने आने के बाद सबूत इकट्ठा करना शुरू किया। 11 दिसंबर 2011 को उसे गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई और मामला लगभग 15 वर्षों तक अदालत में चला। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए।


अंततः, मुजफ्फरनगर के फास्ट-ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई।