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मुंबई में बीएमसी चुनावों में मतदान की स्थिति और विवाद

मुंबई में बीएमसी चुनावों में 41.08% मतदान दर्ज किया गया है, जिसमें कई बॉलीवुड हस्तियों ने भाग लिया। हालांकि, चुनाव में अमिट स्याही को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, जिसके बाद राज्य चुनाव आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं। राजनीतिक नेताओं ने भी तकनीकी समस्याओं और मतदाता नामों के गायब होने पर चिंता जताई है। उद्धव ठाकरे ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। जानें इस चुनाव के बारे में और क्या कुछ हो रहा है।
 

बीएमसी चुनावों में मतदान का आंकड़ा

मुंबई में बीएमसी चुनावों के दौरान दोपहर 3:30 बजे तक 41.08% मतदान की रिपोर्ट आई है। इस चुनाव में कई बॉलीवुड सितारे जैसे सलमान खान, जाह्नवी कपूर, और सौम्या टंडन ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।


महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने बताया कि मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई गई अमिट स्याही को मिटाने की शिकायतों के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एसीटोन या नेल पॉलिश से स्याही को मिटाने के दावे गलत हैं और चेतावनी दी कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


अमिट स्याही की विशेषताएँ

वाघमारे ने पत्रकारों को बताया कि 2011 से इस्तेमाल हो रही अमिट स्याही वाले मार्कर एक ही कंपनी द्वारा बनाए जाते हैं और इनकी संरचना समान है। स्याही को लगाने के बाद सूखने में 10 से 12 सेकंड लगते हैं और एक बार सूखने के बाद इसे मिटाना संभव नहीं है। सोशल मीडिया पर स्याही से संबंधित भ्रामक वीडियो साझा करना अस्वीकार्य है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


राजनीतिक हस्तियों की भागीदारी

चुनाव में कई प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। महाराष्ट्र के मंत्री गणेश नाइक और उनके परिवार ने बोनकोड मतदान केंद्र पर वोट डाला। पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्र ने उच्च आय वाले मतदाताओं की शिकायतों के बावजूद वोट न डालने की आलोचना की। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे और अनिल परब ने भी मतदान किया और तकनीकी समस्याओं को लेकर चिंता जताई। दुबे ने चुनाव आयोग की वेबसाइट में खामियों और डिजिटल मतपत्रों में अनियमितताओं की ओर इशारा किया।


परब ने यह भी कहा कि चुनाव स्याही को मिटाया जा सकता है, जिससे संभावित छेड़छाड़ का संकेत मिलता है।


उद्धव ठाकरे की आलोचना

शिवसेना यूबीटी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मतदाता नामों के गायब होने, पुरानी ईवीएम मशीनों और स्याही की अनियमितताओं पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे "लोकतंत्र पर खुला हमला" करार दिया और इसे "एक राष्ट्र एक चुनाव" प्रस्ताव से जुड़ी चिंताओं से जोड़ा।