मुंबई में बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना की राजनीति में हलचल
बीएमसी चुनाव परिणामों का असर
मुंबई: ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को मिली हार के बाद, पार्टी के 29 पार्षदों को एक फाइव-स्टार होटल में ठहराया गया है, जिसे 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' का नया उदाहरण माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बीजेपी के दबाव में होने का आरोप लगाया है, यह कहते हुए कि यह सब मेयर पद पर नियंत्रण पाने की साजिश का हिस्सा है।
चुनाव परिणाम और सीटों का बंटवारा
बीएमसी चुनाव में कुल 227 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) ने 112 सीटें जीतकर बहुमत के करीब पहुंच गई है। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को केवल 45 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस और एनसीपी ने क्रमशः 30 और 25 सीटें हासिल कीं। मेयर पद के लिए 114 सीटों की आवश्यकता है, जिससे पार्षदों की खरीद-फरोख्त की आशंका बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव गुट के इन 29 पार्षदों को मुंबई से बाहर एक होटल में भेजा गया है ताकि वे विरोधी खेमे से दूर रहें।
उद्धव ठाकरे के आरोप
उद्धव ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "एकनाथ शिंदे बीजेपी के दबाव में हैं। वे मेयर पद पर अपने व्यक्ति को बिठाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हमारे पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है, लेकिन हम मुंबई की जनता के लिए लड़ते रहेंगे। यह रिसॉर्ट पॉलिटिक्स महाराष्ट्र की राजनीति को कलंकित कर रही है।" ठाकरे ने यह भी कहा कि शिंदे गुट ने चुनाव में धनबल और सत्ता का दुरुपयोग किया है, जिसकी जांच की मांग की।
मुख्यमंत्री शिंदे का जवाब
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "उद्धव ठाकरे हार से बौखला गए हैं। बीएमसी में हमारा गठबंधन मजबूत है और मेयर हमारा ही बनेगा। पार्षदों को होटल में ठहराने की बात बेबुनियाद है—यह उनकी सुरक्षा के लिए है। बीजेपी के साथ हमारा गठबंधन मजबूत है, लेकिन कोई दबाव नहीं है।" शिंदे ने आगे कहा कि मुंबई के विकास के लिए बीएमसी पर नियंत्रण आवश्यक है और वे जनता के हित में काम करेंगे।
बीजेपी का रुख
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने भी उद्धव के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा, "यह सब हार की खीझ है। बीएमसी चुनाव में जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है। हम पारदर्शी तरीके से मेयर चुनाव कराएंगे।"
सुरक्षा और राजनीतिक विश्लेषण
इस बीच, मुंबई पुलिस ने होटल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है और पार्षदों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति 2022 की शिंदे विद्रोह की याद दिलाती है, जब उद्धव सरकार गिर गई थी। यदि पार्षदों का कोई गुट टूटता है, तो मेयर चुनाव में बड़ा उलटफेर हो सकता है। कांग्रेस और एनसीपी ने उद्धव गुट को समर्थन देने का ऐलान किया है, लेकिन संख्या बल अभी शिंदे-बीजेपी के पक्ष में है।