मुंबई में फर्जी तांत्रिक की अघोरी साधना से हड़कंप
मुंबई में अजीबोगरीब घटनाएं
मुंबई समाचार: मुंबई का मलाड ईस्ट क्षेत्र हाल के दिनों में एक अजीब दहशत और जिज्ञासा का केंद्र बन गया है। इसकी वजह है 37 वर्षीय रिदम पंचाल, जो खुद को दैवीय शक्तियों का स्वामी बताता है। नासिक में हुए अशोक खरात मामले की चर्चा अभी खत्म नहीं हुई थी कि इस फर्जी बाबा के कारनामों ने पुलिस और प्रशासन को परेशान कर दिया है। रिदम का दावा है कि हर रविवार और गुरुवार को उसके शरीर में देवी का प्रवेश होता है।
पिछले दो वर्षों से, वह लोगों के दुख दूर करने और भूत-प्रेत भगाने के नाम पर अघोरी अनुष्ठान कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि ये सब गतिविधियां किसी गुप्त स्थान पर नहीं, बल्कि नगर निगम के एक सार्वजनिक पार्क में खुलेआम हो रही थीं।
4 अप्रैल को, इस ढोंगी ने हद पार कर दी, जब उसने सैकड़ों लोगों के सामने जादू-टोने का प्रदर्शन किया। यह तमाशा शाम 6 बजे से शुरू होकर अगली सुबह 6 बजे तक चलता रहा।
डरावनी सामग्री और अजीब मांगें
इलाज और समस्याओं के समाधान के नाम पर, यह फर्जी बाबा नागरिकों से ऐसी चीजें मंगवाता था जिन्हें सुनकर ही रूह कांप जाए। वह भक्तों से कहता था कि संकटों से मुक्ति के लिए उन्हें बकरी का जिगर, श्मशान की राख, शराब की बोतलें, सिगरेट, नींबू, पुराने जूते, काला और लाल कपड़ा, केसर और अन्य पूजा सामग्री लानी होगी। इसके अलावा, वह लोगों को डराकर इन सामग्रियों को शहर के व्यस्त चौराहों पर रखने के लिए मजबूर करता था, जिससे पूरे इलाके में नकारात्मकता का माहौल बन गया था।
स्थानीय निवासियों का विरोध
पढ़े-लिखे समाज में इस तरह की अघोरी हरकतों से स्थानीय लोग काफी समय से परेशान थे। जब स्थिति बर्दाश्त से बाहर हो गई, तो करीब 65 से 70 नागरिक एकजुट हुए। उन्होंने न केवल विरोध किया, बल्कि इस ढोंगी के खिलाफ ठोस सबूत भी जुटाए। स्थानीय लोगों ने रिदम पंचाल के वीडियो और तस्वीरें खींचकर दिंडोशी पुलिस को सौंप दीं। जनता के दबाव और अंधविश्वास निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग के बाद पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए रिदम पंचाल को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी का बचाव और पुलिस की चुनौती
गिरफ्तारी के बाद भी रिदम पंचाल के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि वह कोई जादू-टोना नहीं कर रहा, बल्कि केवल लोक सेवा और पूजा-अर्चना कर रहा है। उसने यह भी दावा किया कि वह इन सब कामों के लिए किसी से पैसे नहीं लेता। हालांकि, पुलिस के पास मौजूद वीडियो साक्ष्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। मुंबई जैसे महानगर में, जहां साक्षरता दर अधिक है, वहां लोगों का ऐसे अंधविश्वासों के जाल में फंसना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। दिंडोशी पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जी बाबा के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट तो काम नहीं कर रहा है।