मुंबई में गणेश चतुर्थी उत्सव की धूम, विसर्जन की प्रक्रिया जारी
मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है, जिसमें लाखों भक्त शामिल हो रहे हैं। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की लोकप्रियता के साथ, बीएमसी ने विसर्जन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कई जलाशयों की व्यवस्था की है। इस बीच, उद्धव और राज ठाकरे की मुलाकात ने राजनीतिक सुलह के संकेत दिए हैं। जानें इस उत्सव की खास बातें और विसर्जन की प्रक्रिया के बारे में।
Aug 29, 2025, 09:34 IST
गणेश चतुर्थी का उत्सव
मुंबई में गणेश चतुर्थी का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। भगवान गणेश का जन्मोत्सव बुधवार को गणेश चतुर्थी से शुरू होकर 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल, जो मुंबई के सबसे प्रसिद्ध गणेश पंडालों में से एक है, हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। 1934 में स्थापित इस मंडल ने इस उत्सव को बड़े श्रद्धा के साथ मनाने की परंपरा को बनाए रखा है। इस वर्ष, गणेश उत्सव के दौरान बृहस्पतिवार रात तक लगभग 30,000 गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, जैसा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बताया। बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि 10 दिवसीय उत्सव के दौरान श्रद्धालु गणेश स्थापना के डेढ़ दिन, पांच दिन और सात दिन बाद मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक शहर में किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। बीएमसी अधिकारी ने कहा, 'उत्सव के दूसरे दिन बृहस्पतिवार रात नौ बजे तक 'डेढ़ दिन' के गणपति की कुल 29,965 प्रतिमाओं का विसर्जन समुद्र, अन्य जलाशयों और कृत्रिम तालाबों में किया गया। इनमें 29,614 'घरेलू' गणपति प्रतिमाएं और 337 'सार्वजनिक' पंडालों की प्रतिमाएं शामिल हैं।'
विसर्जन की प्रक्रिया
अधिकारी ने बताया कि अपराह्न तीन बजे तक डेढ़ दिन के गणपति की 583 प्रतिमाओं में से 55 प्रतिशत से अधिक या 326 का विसर्जन कृत्रिम जलाशयों में किया गया। इस वर्ष, बीएमसी ने (समुद्र तट सहित) 70 प्राकृतिक जलाशयों को चिन्हित किया है और विसर्जन के लिए 288 कृत्रिम तालाब स्थापित किए हैं। पर्यावरण संरक्षण के उपायों के तहत, बीएमसी ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अपनी पर्यावरण अनुकूल गणपति प्रतिमाओं को ड्रम या बाल्टियों में विसर्जित करें, जबकि 'प्लास्टर ऑफ पेरिस' (पीओपी) की छह फुट से कम ऊंचाई वाली मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित किया जाए।
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की मुलाकात
इससे पहले, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे के आवास 'शिवतीर्थ' का दौरा किया। उद्धव का यह दौरा राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच सुलह का संकेत देता है। बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी राज ठाकरे के घर पहुंचे और गणपति बप्पा के दर्शन किए। राज हर साल मुंबई के दादर इलाके में अपने घर पर भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हैं। उद्धव ठाकरे के साथ उनकी पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य ठाकरे भी थे। करीब दो महीने पहले, दोनों भाई एक ही मंच पर साथ आए थे। शिवसेना (उबाठा) ने बाद में 'एक्स' पर गणेश चतुर्थी के अवसर पर ठाकरे परिवार के सभी सदस्यों की एक साथ तस्वीर साझा की। उद्धव और राज चचेरे भाइयों के साथ ही मौसेरे भाई भी हैं। दोनों के पिता सगे भाई और माताएं भी सगी बहनें थीं।
राज ठाकरे का राजनीतिक सफर
एक तस्वीर में राज और उद्धव ठाकरे अपने दादा केशव तथा अपने पिता क्रमश: श्रीकांत और बाल ठाकरे की तस्वीर के पास खड़े हैं। इस फोटो के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि ठाकरे परिवार एक साथ है, जबकि दोनों चचेरे भाई दो दशकों से अपनी अलग राजनीतिक राह पर चल रहे हैं। दोनों के बीच पिछले कुछ महीने में यह सार्वजनिक रूप से ज्ञात कम से कम तीसरी मुलाकात है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए त्रि-फॉर्मूले से संबंधित सरकारी आदेश को राज्य में 'हिंदी थोपने' के आरोपों के बीच वापस लेने के बाद, दोनों ने पांच जुलाई को अपनी 'जीत' का जश्न मनाने के लिए एक साथ मंच साझा किया था। राज पिछले महीने उद्धव को उनके जन्मदिन की शुभकामना देने के लिए बांद्रा स्थित उनके आवास 'मातोश्री' गए थे।
भविष्य की संभावनाएं
राज ठाकरे ने 2005 में अविभाजित शिवसेना छोड़ दी थी और इसके लिए उद्धव ठाकरे को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन लगता है कि 2024 के विधानसभा चुनावों में शिवसेना (उबाठा) और मनसे की करारी हार ने दोनों प्रतिद्वंद्वी चचेरे भाइयों को राजनीतिक अस्तित्व के लिए हाथ मिलाने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। दोनों दलों ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका समेत राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गठबंधन बनाने के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है। साल 2005 में अविभाजित शिवसेना छोड़ने के बाद, राज ठाकरे ने 2006 में मनसे का गठन किया, लेकिन यह पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में काफी हद तक हाशिये पर रही है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे 2013 में अध्यक्ष बनने के बाद से शिवसेना का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका जून 2022 में विभाजन हो गया। उद्धव ठाकरे नवंबर 2019 में अपने राजनीतिक जीवन के शिखर पर पहुंचे जब वह कांग्रेस और अविभाजित राकांपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने।