×

मानव सुथार का टेस्ट डेब्यू: पिता का अंधविश्वास बना बाधा

राजस्थान के युवा स्पिनर मानव सुथार ने अपने टेस्ट डेब्यू में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उनके परिवार का अंधविश्वास उनके ऐतिहासिक पल का गवाह बनने में बाधा बना। पिता जगदीश सुथार ने मैच के दौरान घबराहट के कारण स्टेडियम छोड़ दिया, जिससे परिवार इस महत्वपूर्ण क्षण का हिस्सा नहीं बन सका। जानिए इस दिलचस्प कहानी के बारे में और कैसे मानव ने अपने पहले ओवर में विकेट लेकर इतिहास रचा।
 

पिता का सपना अधूरा रह गया

हर क्रिकेटर का सपना होता है कि जब वह अपने देश के लिए खेलना शुरू करे, तो उसका परिवार उस पल का गवाह बने। राजस्थान के युवा स्पिनर मानव सुथार के साथ भी ऐसा ही हुआ, लेकिन एक भावनात्मक मोड़ ने कहानी को बदल दिया। उनके पिता जगदीश सुथार अपने परिवार के साथ मुल्लांपुर पहुंचे, लेकिन मैच शुरू होने के बाद वे घर लौट गए। इसके पीछे एक अजीब घबराहट और परिवार का अंधविश्वास था। मानव का परिवार उनके डेब्यू का गवाह बना, लेकिन जब उन्हें पहला विकेट मिला, तब परिवार स्टेडियम में मौजूद नहीं था।


मानव का ऐतिहासिक डेब्यू

मानव सुथार ने मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू को यादगार बना दिया। इस 23 वर्षीय स्पिनर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चौथी गेंद पर विकेट लेकर इतिहास रच दिया। उन्होंने अब्दुल मलिक का विकेट लेकर एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया, जिससे वह टेस्ट डेब्यू के पहले ओवर में विकेट लेने वाले भारत के आठवें खिलाड़ी बन गए।


पहले ओवर में विकेट का जश्न

भारत ने अपनी पहली पारी में कप्तान शुभमन गिल और केएल राहुल के शतकों की बदौलत 564/8 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की। इसके बाद, अफगानिस्तान की पारी के छठे ओवर में कप्तान ने गेंद मानव सुथार को दी। युवा स्पिनर ने कप्तान के विश्वास को सही साबित करते हुए अब्दुल मलिक को आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई। मोहम्मद सिराज ने शॉर्ट फाइन लेग पर उनका कैच लिया। मानव के विकेट लेते ही भारतीय टीम ने जश्न मनाया, लेकिन उस समय उनके माता-पिता स्टेडियम में नहीं थे। दरअसल, टेस्ट कैप मिलने के बाद परिवार वापस घर लौट गया था।


परिवार का अंधविश्वास

एक रिपोर्ट के अनुसार, मानव सुथार के पिता जगदीश ने बताया कि वह अपनी पत्नी और बेटी मानसी के साथ बेटे का डेब्यू देखने आए थे। उन्होंने कहा कि बेटे को टेस्ट कैप लेते देखना उनके जीवन का सबसे खास पल था, जिसे वे शब्दों में नहीं कह सकते। लेकिन, वे स्टेडियम में बैठकर उसे खेलते देख काफी नर्वस हो गए थे, और थोड़ा अंधविश्वास भी था। दूसरे दिन के खेल के अंत तक, अफगानिस्तान की टीम 113 रन पर पांच विकेट खो चुकी थी और वे भारत से 451 रन पीछे हैं।