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माता वैष्णो देवी धाम में चांदी चढ़ावे पर उठे गंभीर सवाल

माता वैष्णो देवी धाम में चढ़ाई गई चांदी के चढ़ावे में अनियमितता के आरोपों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर की अदालत ने इस मामले से जुड़े सभी अभिलेख पेश करने का आदेश दिया है। जांच में सामने आया है कि चढ़ाई गई चांदी में केवल पांच प्रतिशत असली धातु थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई असली चांदी को बदल दिया गया। अब अदालत ने जांच अधिकारी को सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और सभी की नजर जांच पर है।
 

चांदी चढ़ावे में अनियमितता के आरोप

अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़े विवाद के बाद अब माता वैष्णो देवी धाम में चढ़ाई गई चांदी को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। जम्मू-कश्मीर की एक अदालत ने पांच सौ पचास करोड़ रुपये मूल्य की चांदी के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों से संबंधित सभी अभिलेख पेश करने का आदेश दिया है। यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं है, बल्कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है।




यह मामला तब शुरू हुआ जब इस वर्ष मई में माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने लगभग बीस टन चांदी को मानक प्रक्रिया के तहत गलाने और सुरक्षित रखने के लिए सरकारी टकसाल में भेजा। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पूरी खेप में केवल पांच प्रतिशत धातु असली चांदी थी, जबकि शेष लगभग पचानवे प्रतिशत हिस्सा सस्ती धातुओं जैसे कैडमियम और लोहे का था। यदि यह दावा सही है, तो पांच सौ पचास करोड़ रुपये आंकी गई चांदी का वास्तविक मूल्य घटकर लगभग तीस करोड़ रुपये रह जाएगा।




शुरुआत में यह माना गया कि श्रद्धालुओं ने अनजाने में नकली चांदी चढ़ा दी होगी। लेकिन अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अपराध शाखा के महानिरीक्षक को शिकायत देकर एक अलग आशंका व्यक्त की। उनका आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई असली चांदी को बदल दिया गया, उसमें मिलावट की गई, और सरकारी अभिलेखों में भी हेरफेर की गई। शिकायत में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वास भंग और सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, और तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।




शिकायत के अनुसार, अपराध शाखा द्वारा समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के बाद मामला जम्मू के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पहुंचा। अपराध शाखा ने अदालत को बताया कि शिकायत को मंजूरी के लिए श्रीनगर स्थित मुख्यालय भेजा गया है और आवश्यक प्रक्रिया चल रही है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता का कहना है कि कानून के अनुसार सीधे प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जानी चाहिए थी।




अब अदालत ने अपराध शाखा के जांच अधिकारी को सभी संबंधित अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। शिकायतकर्ता ने चढ़ावे के संग्रह, भंडारण और परिवहन से जुड़े अभिलेख, निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग, धातु जांच रिपोर्ट, गलाने की प्रक्रिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने की भी मांग की है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए सभी दस्तावेजों को तलब किया है।




हर वर्ष नब्बे लाख से अधिक श्रद्धालु कटरा से त्रिकुट पर्वत स्थित माता वैष्णो देवी धाम की यात्रा करते हैं। इनमें से कई लोग सोना और चांदी का चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यदि श्रद्धालुओं ने असली चांदी चढ़ाई थी, तो वह कहां गई? और यदि वास्तव में नकली चांदी चढ़ाई गई थी, तो वह इतनी बड़ी मात्रा में मंदिर तक कैसे पहुंची? इन दोनों संभावनाओं का उत्तर केवल निष्पक्ष जांच ही दे सकती है।




फिलहाल, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अदालत द्वारा अभिलेख तलब किया जाना यह दर्शाता है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब सभी की नजर जांच पर है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों में धार्मिक चढ़ावे से जुड़ा सबसे बड़ा घोटाला माना जा सकता है। यदि आरोप गलत साबित होते हैं, तो इससे फैली शंकाओं का अंत हो जाएगा। सच अदालत और जांच के दस्तावेजों में छिपा है, जिसका सामने आना बाकी है।