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माघ बिहू उत्सव में पारंपरिक भैंसों की लड़ाई का आयोजन

मध्य असम के मोरीगांव जिले में माघ बिहू उत्सव के दौरान पारंपरिक भैंसों की लड़ाई का आयोजन किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद हुआ। बैद्यबोरी और अहतगुरी में आयोजित इन मुकाबलों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। असम सरकार ने भैंसों की लड़ाई की अनुमति देने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की थी, लेकिन गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया। इस आयोजन की परंपरा और विवादों के बारे में जानें।
 

मोरीगांव में भैंसों की लड़ाई का आयोजन

मध्य असम के मोरीगांव जिले के कुछ क्षेत्रों में माघ बिहू उत्सव के तहत बृहस्पतिवार को 'मोह जुज' (पारंपरिक भैंसों की लड़ाई) का आयोजन किया गया।


हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने ऐसे मुकाबलों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, फिर भी यह आयोजन हुआ।


स्थानीय लोगों की भागीदारी

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, बैद्यबोरी और अहतगुरी में आयोजित इन मुकाबलों में आसपास के निवासियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, इसे विचाराधीन बताते हुए।


भैंसों की संख्या और मुकाबले

बैद्यबोरी में 40 से अधिक भैंसों के जोड़े उनके मालिकों द्वारा लाए गए थे, और कुछ मुकाबले 20 मिनट से अधिक समय तक चले। अहतगुरी में 33 जोड़ियों ने भाग लिया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित हुए। यह पारंपरिक आयोजन माघ बिहू फसल उत्सव के साथ मनाया जाता है।


सरकारी मानक संचालन प्रक्रिया

असम सरकार ने 2023 में माघ बिहू के दौरान भैंसों और बुलबुल पक्षियों की लड़ाई की अनुमति देने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी। लेकिन गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 2014 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन बताते हुए इसे दिसंबर 2024 में रद्द कर दिया।