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महुआ मोइत्रा ने योगी आदित्यनाथ की आलोचना की, अखिलेश यादव ने भी किया जवाब

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में एक रैली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना की, उन्हें 'बुलडोजर बुद्धि' कहा। इस विवाद में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अपनी राय रखी, यह कहते हुए कि केवल उन्हीं का नाम बदला जाता है जो खुद अपना नाम बदलते हैं। मोइत्रा ने आदित्यनाथ पर एक प्रसिद्ध उद्धरण को गलत तरीके से उद्धृत करने का आरोप लगाया, जिससे राजनीतिक बहस और भी गर्म हो गई। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

टीएमसी सांसद की तीखी टिप्पणी

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में आयोजित एक रैली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना की। उन्होंने आदित्यनाथ को 'बुलडोजर बुद्धि' कहा, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने एक प्रसिद्ध उद्धरण को गलत तरीके से उद्धृत किया। इस विवाद में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि केवल उन्हीं लोगों के नाम बदले जाते हैं जो खुद अपना नाम बदलते हैं। यह टिप्पणी आदित्यनाथ के शासन में स्थानों और संस्थानों के नाम बदलने की प्रथा पर एक तीखा व्यंग्य प्रतीत होती है।


मोइत्रा का ट्वीट

महुआ मोइत्रा ने अपने ट्वीट में आदित्यनाथ को सीधे निशाना बनाते हुए लिखा, "हैलो बुलडोजर बुद्धि योगी आदित्यनाथ, अपने तथ्यों को सही करो। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कहा था, 'मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा'। यह कथन स्वामी विवेकानंद का नहीं है। कृपया उत्तर प्रदेश में जाकर फैंटा पीते रहो और बंगाल को अकेला छोड़ दो। तुम एक मजाक हो।"


टीएमसी के आधिकारिक हैंडल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें आदित्यनाथ को स्वामी विवेकानंद के नाम से गलत उद्धरण देते हुए दिखाया गया।


वीडियो में गलत उद्धरण

इस वीडियो में यह बताया गया कि योगी आदित्यनाथ ने भाजपा की बंगाल के इतिहास के प्रति अज्ञानता को उजागर किया है। उन्होंने अमर कथन 'मुझे रक्त दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा' को स्वामी विवेकानंद के नाम से उद्धृत किया, जबकि यह कथन नेताजी सुभाष चंद्र बोस का है। पोस्ट में आगे कहा गया कि ये दोनों व्यक्तित्व और उनकी विरासतें पूरी तरह से अलग हैं।


आगे लिखा गया कि ये लोग स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बीच का अंतर नहीं समझते और गलत उद्धरण देते हैं। वे स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माला चढ़ाते हुए उन्हें नेताजी कहते हैं। उनकी अज्ञानता की गहराई उनके अहंकार के बराबर है।