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महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

महिलाओं ने जंतर-मंतर पर 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में एआईपीडब्ल्यूए और अन्य महिला संगठनों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से आरक्षण को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से न जोड़ने की अपील की। एआईपीडब्ल्यूए की महासचिव मीना तिवारी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण को सांप्रदायिक राजनीति से जोड़ने का प्रयास कर रही है। जानें इस प्रदर्शन की पूरी कहानी और महिलाओं की एकजुटता के बारे में।
 

महिलाओं का प्रदर्शन और आरक्षण की मांग

नई दिल्ली, 7 अगस्त: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से जुड़ी 'अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन' (एआईपीडब्ल्यूए) के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आरक्षण को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया या जनगणना से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।


इस प्रदर्शन का आयोजन 'राष्ट्रीय महिला आरक्षण गठबंधन' के बैनर तले किया गया, जिसमें एआईपीडब्ल्यूए के अलावा कई अन्य महिला संगठनों ने भी भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, दिल्ली और आसपास के राज्यों से महिलाएं इस प्रदर्शन में शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के आधार पर महिला आरक्षण को लागू करने की मांग की।


एआईपीडब्ल्यूए की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने सभा में बोलते हुए हाल में प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों पर की गई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर अपनी 'सांप्रदायिक राजनीति' को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। तिवारी ने कहा, 'भाजपा सरकार 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर अपनी सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देना चाहती है।'


उन्होंने यह भी कहा कि देशभर की महिलाएं इस मुद्दे पर एकजुट हैं और सरकार को झुकना पड़ेगा। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मौजूदा मानसून सत्र में बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए।