×

महिला सशक्तिकरण विधेयक पर विपक्ष की आलोचना, केंद्रीय मंत्री का बयान

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने लोकसभा में महिला सशक्तिकरण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने पर विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने इस महत्वपूर्ण पहल में बाधा डाली है। सिंह ने कहा कि महिला मतदाता इस घटनाक्रम पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया देंगी। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और क्या है विपक्ष का रुख।
 

महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण विधेयक पर विवाद

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने शनिवार को लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित न होने पर विपक्ष की तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई इस महत्वपूर्ण पहल में बाधा डाली है। सिंह ने कहा कि महिला मतदाता इस घटनाक्रम पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया देंगी।


विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा विधेयक की हार को लोकतंत्र की जीत बताने पर सिंह ने कहा कि विपक्ष उस ऐतिहासिक पहल को नुकसान पहुंचा रहा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए शुरू किया था।


सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष का यह कहना कि विधेयक का गिरना एक ऐतिहासिक कदम है, गलत है। उनका तर्क है कि यह ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को विफल कर दिया है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं को न्याय दिलाना था।


केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा प्रमुख सामाजिक सुधारों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह चरित्र है कि वह समाज में सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों को रोकने की कोशिश करती है।


सिंह ने यह भी कहा कि देशभर की महिला मतदाता इस विधेयक पर विपक्ष के रुख का राजनीतिक जवाब देंगी और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ एकजुट होकर वोट डालेंगी।


ये टिप्पणियां भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहने के बाद आई हैं। यह विधेयक परिसीमन के माध्यम से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से संबंधित था। मतदान में 298 सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया जबकि 230 ने इसका विरोध किया, जिसके कारण यह विधेयक असफल रहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पुष्टि की कि विधेयक संवैधानिक बहुमत से कम होने के कारण पारित नहीं हो सका।