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महिला के पेट में 15 साल तक रहा मृत भ्रूण, जानें लिथोपीडियन बीमारी के बारे में

एक 52 वर्षीय महिला ने 10 साल तक अपने पेट में एक मृत भ्रूण को रखा, जिसके बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। यह मामला लिथोपीडियन बीमारी से जुड़ा है, जिसमें भ्रूण मरने के बाद मां का शरीर उसे कैल्शियम की परत से ढक देता है। जानें इस दुर्लभ बीमारी के बारे में और कैसे यह महिला अब स्वस्थ है।
 

एक अनोखी कहानी


मां बनना एक अद्भुत अनुभव होता है, लेकिन जब यह अनुभव डरावने सपने में बदल जाए, तो क्या होगा? आज हम आपको एक ऐसी मां के बारे में बताएंगे जिसने 10 साल तक अपने पेट में एक बच्चे को रखा, लेकिन उसे इसका एहसास नहीं हुआ।


महिला की स्वास्थ्य समस्याएं

नागपुर के एक छोटे गांव में रहने वाली 52 वर्षीय महिला पिछले तीन साल से उल्टियों का सामना कर रही थी और 10 साल से पेट दर्द से परेशान थी। उसने कई डॉक्टरों से सलाह ली, लेकिन किसी ने भी उसके दर्द का सही कारण नहीं बताया। उसे केवल पेनकिलर और एसिडिटी की दवाएं दी गईं। जब दर्द असहनीय हो गया, तो उसने एक गायनेकोलोजिस्ट से संपर्क किया।


जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

गायनेकोलोजिस्ट की जांच में पता चला कि महिला के शरीर में 15 साल से एक मृत भ्रूण था, जो अब पत्थर के समान हो चुका था। दरअसल, 15 साल पहले महिला गर्भवती हुई थी, लेकिन उसके ससुराल वालों के दबाव में उसने गर्भपात कराया था। महिला को लगा कि भ्रूण बाहर निकल गया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


लिथोपीडियन बीमारी की जानकारी

यह स्थिति लिथोपीडियन नामक बीमारी के कारण हुई है। इस बीमारी में, यदि भ्रूण मर जाता है, तो मां का शरीर उसे संक्रमण से बचाने के लिए कैल्शियम की एक परत बना देता है। यह प्रक्रिया उस तरह होती है जैसे प्राचीन लोग मृत शरीर को सुरक्षित रखने के लिए करते थे।


वर्तमान में, महिला पूरी तरह स्वस्थ है। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि अब तक दुनिया भर में इसके केवल 300 मामले ही दर्ज हुए हैं।