महिला आरक्षण बिल 2023: संसद में विशेष सत्र और विपक्ष की चिंताएँ
महिला आरक्षण बिल का महत्व
महिला आरक्षण बिल 2023 अब कानून बन चुका है, और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होनी है। हालांकि, विपक्ष के नेताओं द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों के कारण लोगों में यह भ्रम उत्पन्न हो गया है कि जब यह बिल पहले ही पारित हो चुका है, तो संसद के विशेष सत्र में क्या नया होने वाला है। वास्तव में, 16 अप्रैल से शुरू हुए इस विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने हैं, जिनका उद्देश्य 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण को प्रभावी बनाना और लोकसभा में सीटों की संख्या को 850 करना है.
इन विधेयकों में से दो को कानून मंत्री और एक को गृह मंत्री पेश करेंगे। इस पर 18 घंटे की चर्चा होगी, और लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में भी इस पर चर्चा की जाएगी. पहले समझते हैं कि इन तीनों विधेयकों में क्या शामिल है, और फिर जानते हैं कि विपक्ष को आपत्ति क्यों है?
1. केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 – इसमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुदुचेरी की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान है.
2. 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 – इसके तहत जनसंख्या की नई परिभाषा तय की जाएगी और बढ़ती जनसंख्या के अनुसार संसद में सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
3. परिसीमन विधेयक 2026 – इसमें लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा.
तीनों विधेयकों के पारित होने से क्या परिवर्तन आएगा?
यदि ये विधेयक पास होते हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू होने का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार का उद्देश्य है कि इसका लाभ अगले चुनाव में महिलाओं को मिले। सरकार का स्पष्ट कहना है कि ये तीनों प्रस्ताव महिला आरक्षण से जुड़े हैं. हालांकि, कई विपक्षी दलों को चिंता है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से उनकी राष्ट्रीय ताकत कम हो जाएगी. दक्षिण के नेता इस पर चिंतित हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि बढ़ेंगी. इस परिप्रेक्ष्य में, भविष्य में राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन की बात चल रही थी, और नई जनगणना शुरू भी हो चुकी है. पहले यह चिंता जताई गई थी कि आरक्षण लागू करने में समय लगेगा, लेकिन अब सरकार इन विधेयकों के माध्यम से इसे 2029 चुनाव से पहले लागू करना चाहती है.
राहुल गांधी का समर्थन और अब विरोध क्यों?
राहुल गांधी ने 2023 में सोनिया गांधी का संसद में बिल को समर्थन देने का वीडियो साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि संसद ने 2023 में सर्वसम्मति से यह बिल पारित किया था, जो अब संविधान का हिस्सा है। लेकिन अब जो प्रस्ताव सरकार ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई संबंध नहीं है, बल्कि यह परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में जानबूझकर हेरफेर करने का प्रयास है.
उन्होंने पिछली जनगणना के आंकड़ों के उपयोग पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि उसमें पिछड़े वर्ग का आंकड़ा नहीं है। राहुल ने कहा कि OBC, दलित और आदिवासी समुदायों के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने छोटे राज्यों और दक्षिण के राज्यों के संदर्भ में भी गंभीर सवाल उठाए.
विपक्ष को सरकार की मंशा पर संदेह क्यों है?
विशेष सत्र बुलाए जाने की जानकारी मिलने पर विपक्षी दलों ने इसे विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं को आकर्षित करने का एक हथकंडा बताया। इसे तुष्टीकरण की राजनीति कहा गया। कई विपक्षी दल महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण में विशेष कोटा की मांग कर रहे हैं, जैसा कि पहले भी किया गया था. तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों के नेता कह रहे हैं कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर उत्तर भारत को अधिक सीटें मिलेंगी, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी. हर परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों में बदलाव की चिंताएं भी हैं.
महिला आरक्षण पर तेजस्वी यादव का तर्क
तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की नैतिक ढाल लेकर पूर्व में पारित महिला आरक्षण बिल को लागू किए बिना उसमें संशोधन, परिसीमन के बहाने संविधान और संघीय ढांचे को कमजोर करने के लिए ‘विशेष संसद सत्र’ बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि हम महिला आरक्षण के पक्षधर हैं, और महिलाओं की आधी आबादी को 33% नहीं बल्कि 50% आरक्षण मिलना चाहिए, जिसमें SC/ST और OBC की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए.
मायावती का स्वागत
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ाने का स्वागत करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि शोषित और उपेक्षित वर्गों की महिलाओं को अलग से आरक्षण दिया जाता, तो यह उचित होता. ऐसा न होने से इन वर्गों की महिलाओं को महिला आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा, जिसमें लोगों को संदेह है.