महिला आरक्षण पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यह कहते हुए कि यह अभियान राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। उन्होंने संसद में हालिया घटनाक्रमों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें विपक्ष की एकता की जीत हुई। रमेश ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए जाति जनगणना और परिसीमन के मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और क्या कहा उन्होंने।
Apr 20, 2026, 14:19 IST
महिला आरक्षण का राजनीतिक स्वार्थ से जुड़ाव
कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश ने सोमवार को यह आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के लिए चलाया जा रहा अभियान असली इरादों से नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए यह मुद्दा सत्ता में बने रहने और अपनी स्थिति को मजबूत करने का था, न कि महिलाओं के आरक्षण का। रमेश ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की हार विपक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे की जीत हुई है। बेलगाम और परिसीमन की राजनीति को हार का सामना करना पड़ा। असल मुद्दा परिसीमन था, न कि महिला आरक्षण।
रमेश ने आगे कहा कि विपक्ष पूरी तरह से एकजुट रहा और उनकी एकता विजयी हुई। पिछले 12 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि विपक्ष की एकता को तोड़ने में सफल नहीं हो सके। लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव करने वाला विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में असफल रहा। इसके पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पुष्टि की कि विधेयक पारित नहीं हुआ है, जिसके कारण सरकार ने संबंधित परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को वापस ले लिया।
रमेश ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पहले लागू नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि अचानक 16 अप्रैल की रात को विधेयक अधिसूचित कर दिया गया। उन्होंने पूछा, 'आपका (भाजपा का) इरादा क्या है? इतनी जल्दी क्या थी?' इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की संख्या 543 है, फिर भी संवैधानिक विधेयक में राज्यों के हिस्से में आनुपातिक वृद्धि का उल्लेख क्यों नहीं है, जबकि गृह मंत्री ने सदन में इसका जिक्र किया था। उन्होंने सवाल किया, 'हम उस व्यक्ति पर कैसे भरोसा कर सकते हैं जो कुछ कहता है, लेकिन विधेयक में उसका जिक्र नहीं है?'
उन्होंने आगे यह भी कहा कि असम और जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए परिसीमन खतरनाक और भरोसेमंद नहीं थे। रमेश ने सरकार पर जाति जनगणना से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि सरकार जाति जनगणना कैसे कराएगी। उन्होंने कहा, 'असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह खतरनाक और भरोसेमंद नहीं है। आप जाति जनगणना से क्यों भाग रहे हैं?'