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महिला आरक्षण कानून पर अलका लांबा की कड़ी आलोचना

अलका लांबा ने शिमला से एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण कानून को लागू न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कानून पारित हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा इसे लागू नहीं कर रही है। लांबा ने प्रधानमंत्री मोदी को गुमराह करने का भी आरोप लगाया और ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की। इस अभियान में दस लाख महिलाएं शामिल होंगी, जो अपने अधिकारों की मांग करेंगी।
 

महिला कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी अभियान

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने 5 मई को शिमला से एक व्यापक अभियान की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के पारित होने के बावजूद महिला आरक्षण कानून को लागू करने में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विफलता की आलोचना की। शिमला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, लांबा ने केंद्र सरकार पर जानबूझकर कानून को लागू करने में देरी कर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।


 


लांबा ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका है, राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है और अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। फिर भी भाजपा सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री देश को क्यों गुमराह कर रहे हैं। लांबा ने यह भी कहा कि भाजपा ऐतिहासिक रूप से महिला आरक्षण का विरोध करती रही है और कांग्रेस की भूमिका को उजागर किया। उनका कहना था कि यदि भाजपा की मंशा सही होती, तो महिलाओं को 2014 में ही उनके अधिकार मिल जाते। विपक्ष के दबाव में ही सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाने का कदम उठाया।


 


उन्होंने कानून को परिसीमन या जनगणना प्रक्रियाओं से जोड़े बिना तुरंत लागू करने की मांग की। लांबा ने जोर देकर कहा कि लोकसभा में 543 सीटें हैं, और यदि यह कानून आज लागू होता है, तो लगभग 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि भाजपा महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दे रही है। इसके साथ ही, उन्होंने ओबीसी महिलाओं को आरक्षण में शामिल करने की आवश्यकता पर भी चिंता व्यक्त की।


 


लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक बड़े पोस्टकार्ड अभियान की घोषणा की, जिसमें देशभर से दस लाख महिलाएं शामिल होंगी। उन्होंने इसे जन आंदोलन की शुरुआत बताया और कहा कि वे गांवों, विधानसभा क्षेत्रों और शहरी इलाकों में हस्ताक्षर अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उनका उद्देश्य हर पंचायत, हर वार्ड और हर जिले तक पहुंचना है, ताकि महिलाएं अपनी आवाज उठाकर अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर सकें।