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महाराष्ट्र में नौकरी के नाम पर 70 लाख रुपये की ठगी, तीन गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक व्यक्ति से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 70 लाख रुपये ठगने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता को ठगा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के पास से कई फर्जी सरकारी लेटरहेड और मुहरें बरामद की हैं। यह मामला ठगी के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करता है।
 

ठाणे में नौकरी दिलाने का झांसा

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक व्यक्ति से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 70 लाख रुपये ठगने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले की जानकारी दी। पुलिस उपायुक्त (अपराध) अमरसिंह जाधव के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता दर्शन संतोष पाटिल को मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर वाला एक नकली पत्र दिखाकर अपने जाल में फंसाया।


फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल

इन दस्तावेजों पर राष्ट्रीय प्रतीक भी अंकित था। जाधव ने बताया कि पाटिल ने ऑनलाइन और बैंकिंग माध्यमों के साथ-साथ नकद में आरोपियों को 70 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद, आरोपियों ने उन्हें एक फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र प्रदान किया, जिसमें उन्हें राजस्व एवं वन विभाग में 'क्लर्क-टाइपिस्ट' के पद पर नियुक्त दिखाया गया।


शिकायत और गिरफ्तारी

जब पाटिल को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर, अपराध शाखा ने जांच शुरू की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुंबई निवासी शाम विठोबा खातकर (55), ठाणे निवासी जुगल कुमार लोदाया उर्फ लोधिया (39) और कल्याण (पूर्व) निवासी रवींद्र दयानिधि संखुआ (52) के रूप में हुई है।


फर्जी दस्तावेजों की बरामदगी

पुलिस ने आरोपियों के पास से कई फर्जी सरकारी लेटरहेड, नकली रबर स्टैंप और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम वाली आधिकारिक मुहरें बरामद की हैं। पुलिस ने बताया कि ये तीनों आरोपी आदतन अपराधी हैं और उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की फर्जी मुहर और लेटरहेड कैसे प्राप्त किए।


जांच का विस्तार

जाधव ने कहा, “हम यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या आरोपियों ने और लोगों को भी ठगा है।”