महाराष्ट्र के मंत्री ने कॉर्पोरेट जगत में समान ड्रेस कोड की मांग की
कॉर्पोरेट जगत में ड्रेस कोड की आवश्यकता
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने बुधवार को लेंसकार्ट के ड्रेस कोड विवाद के संदर्भ में कॉर्पोरेट क्षेत्र में एक समान ड्रेस कोड लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के नियमों की तुलना करते हुए कहा कि जैसे स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब और बुर्का पहनने के लिए नियम हैं, वैसे ही कॉर्पोरेट जगत में भी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे नियम होने चाहिए। राणे ने यह भी कहा कि ये नियम किसी विशेष धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए समान रूप से लागू होने चाहिए।
हिजाब और तिलक पर समान व्यवहार की मांग
राणे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम सभी ईश्वर में विश्वास करते हैं, लेकिन कॉर्पोरेट क्षेत्र में हिजाब और बुर्का की अनुमति है, जबकि तिलक की अनुमति नहीं है। यदि एक धर्म की प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो अन्य धर्मों के साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब और बुर्का की अनुमति पर चल रही बहस के समान, कॉर्पोरेट जगत में भी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इन पर प्रतिबंध होना चाहिए।
लेंसकार्ट का विवाद और प्रतिक्रिया
राणे की यह टिप्पणी लेंसकार्ट के आंतरिक ड्रेस कोड दिशानिर्देशों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आई है। चश्मे बेचने वाली कंपनी ने अपने स्टोर कर्मचारियों के लिए बिंदी और तिलक की अनुमति न देने के विवाद के बीच एक मानकीकृत स्टाइल गाइड जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे आस्था और संस्कृति के हर प्रतीक का स्वागत करते हैं।
लेंसकार्ट ने कार्यस्थल पर संचार के दौरान टीम के सदस्यों की आस्था को ठेस पहुँचाने की आशंका के लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी टीम सदस्य को उनके आस्था के प्रतीकों के प्रति असम्मान का अनुभव हुआ है, तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। लेंसकार्ट ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया है कि उनकी सभी नीतियाँ और संचार इन मूल्यों को दर्शाएँ।