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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के भीतर बगावत का खतरा

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) के भीतर दलबदल का खतरा फिर से उभरता नजर आ रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में 9 लोकसभा सांसदों में से 7 सांसद दिल्ली में हैं और सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। इस संभावित विद्रोह के पीछे आदित्य ठाकरे को पार्टी में एक महत्वपूर्ण भूमिका देने की योजना है। जानें शिवसेना के इतिहास में बगावतों की कहानी और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर इसका प्रभाव।
 

शिवसेना (UBT) में दलबदल की आशंका

महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर से इतिहास के पन्नों को पलटती नजर आ रही है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर दलबदल का खतरा मंडरा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 7 सांसद इस समय दिल्ली में हैं और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं।


आदित्य ठाकरे की भूमिका पर असंतोष

कुछ सूत्रों का कहना है कि इस संभावित विद्रोह के पीछे आदित्य ठाकरे को पार्टी में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व की भूमिका देने की योजना है। शिंदे गुट के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कई सांसद आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में काम करने को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।


आगामी घोषणा की संभावना

कयास लगाए जा रहे हैं कि 19 जून को, जो अविभाजित शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस है, शिवसेना (UBT) आदित्य ठाकरे के संबंध में कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकती है। यह अटकलें तब बढ़ी जब उद्धव ठाकरे द्वारा आयोजित सांसदों की बैठक में केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। हालांकि, पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि अन्य सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे।


शिवसेना के इतिहास में बगावतें

शिवसेना को अपने प्रमुख नेताओं की बगावत का सामना पहले भी करना पड़ा है। बाल ठाकरे के समय से लेकर अब तक, पार्टी ने कई महत्वपूर्ण विभाजन देखे हैं। यहाँ शिवसेना के इतिहास की चार प्रमुख बगावतों पर एक नजर डालते हैं:


छगन भुजबल की बगावत

1991 में, वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने अविभाजित शिवसेना से अलग होकर 17 विधायकों को अपने साथ लेकर कांग्रेस में शामिल हो गए। यह पार्टी के लिए पहला बड़ा झटका था।


नारायण राणे का पार्टी छोड़ना

2005 में, पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे को पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने शिवसेना छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। इससे कोंकण क्षेत्र में शिवसेना का आधार कमजोर हुआ।


राज ठाकरे का विद्रोह

उसी वर्ष, बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने पार्टी छोड़ दी और 2006 में अपनी खुद की पार्टी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की स्थापना की।


एकनाथ शिंदे की बगावत

2022 में, एकनाथ शिंदे ने बगावत की, जिससे उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई। बागी नेताओं ने उद्धव के 2019 के निर्णय पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और NCP के साथ गठबंधन किया। यह बगावत न केवल शिवसेना को दो गुटों में बांटने का कारण बनी, बल्कि महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को भी बदल दिया।