महायुति गठबंधन में दरारें: अजीत पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच आरोप-प्रत्यारोप
महायुति गठबंधन में बढ़ती दरारें
सत्ताधारी महायुति गठबंधन में दरारें अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी हैं। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीएमसी और नगर निकाय चुनावों से पहले शासन, मुफ्त योजनाओं और भ्रष्टाचार के आरोपों पर एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। हालिया विवाद तब शुरू हुआ जब पवार ने पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान फडणवीस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह केवल शासन की विफलताओं को उजागर कर रहे हैं, न कि व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं।
पवार ने कहा कि नगर निगम चुनावों के कारण उनकी आलोचना और भी तीव्र हो गई है। उन्होंने भाजपा पर 2017 से 2022 तक पीसीएमसी के शासनकाल में भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाया। पवार ने यह भी कहा कि भाजपा द्वारा किए गए 27 वादों में से कोई भी पूरा नहीं किया गया।
उन्होंने रावेत और भोसारी जैसे क्षेत्रों में झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण परियोजनाओं में अनियमितताओं की जांच की मांग की और सवाल उठाया कि इन योजनाओं के तहत दिए गए विकास अधिकारों का लाभ किसे मिला।
भ्रष्टाचार और विकास योजनाओं पर सवाल
पवार ने बुनियादी ढांचे की लागत में वृद्धि का भी उल्लेख किया, जिसमें एक पुल परियोजना की लागत 70 लाख रुपये से बढ़कर 7 करोड़ रुपये हो गई। अपने गठबंधन के चुनावी एजेंडे का अनावरण करते हुए, उन्होंने कई वादे किए, जैसे कि 1 अप्रैल, 2026 से 500 वर्ग फुट तक के घरों पर संपत्ति कर में छूट, मसौदा विकास योजना को रद्द करना, दैनिक जल आपूर्ति और मुफ्त बस एवं मेट्रो यात्रा।
अन्य वादों में बेहतर सड़कें, प्रदूषण नियंत्रण, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, आदर्श विद्यालय, छात्रों के लिए मुफ्त टैबलेट और कौशल प्रशिक्षण पूरी करने वाली महिलाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण शामिल हैं।