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महबूबा मुफ़्ती का अजीत डोभाल पर तीखा हमला, कहा- नफरत की विचारधारा में शामिल होना दुर्भाग्यपूर्ण

महबूबा मुफ़्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पुरानी घटनाओं का बदला लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने डोभाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नफरत की विचारधारा में शामिल होने का आरोप लगाया। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और महबूबा के विचार।
 

महबूबा मुफ़्ती का बयान

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पुरानी घटनाओं का बदला लेने की बात करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर साझा की गई पोस्ट में यह भी कहा कि एनएसए का मुख्य कार्य देश की सुरक्षा करना है, लेकिन यह दुखद है कि उन्होंने "नफरत की सांप्रदायिक विचारधारा" को अपनाने का निर्णय लिया है।


डोभाल का बयान और महबूबा का जवाब

महबूबा ने याद दिलाया कि डोभाल ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत को अपनी सीमाओं के साथ-साथ आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में भी मजबूत होना चाहिए, ताकि हमलों और दमन के इतिहास का "बदला" लिया जा सके। महबूबा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी, जिनका कर्तव्य देश की रक्षा करना है, उन्होंने नफरत की विचारधारा को अपनाया और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने का विकल्प चुना है।"


सदियों पुरानी घटनाओं का बदला लेने का आह्वान

महबूबा ने आगे कहा कि 21वीं सदी में सदियों पुरानी घटनाओं का बदला लेने का आह्वान एक सांकेतिक संदेश है, जो गरीब और अशिक्षित युवाओं को एक अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ भड़काता है, जो पहले से ही हमलों का सामना कर रहा है।


डोभाल का ऐतिहासिक संदर्भ

डोभाल ने अपने बयान में कहा था कि भारत को अपनी सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि आर्थिक और तकनीकी रूप से भी मजबूत बनाना होगा। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्षों, भारत की सभ्यता पर हुए हमलों और मजबूत नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और इस देश को फिर से उस स्थिति में लाना है, जहां हम अपने अधिकारों और विचारों के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें।