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महंगाई का नया झटका: कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी वृद्धि

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद, केंद्र सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की भारी वृद्धि की है। इस पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह गरीबों की थाली पर सीधा असर डालता है। दिल्ली में अब कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और इसके प्रभाव के बारे में।
 

महंगाई का असर: कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद, महंगाई ने एक बार फिर से अपने रंग दिखाना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी इजाफा किया है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। आज से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में सीधे 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।


अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया

इस वृद्धि पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जब गैस के दाम बढ़ते हैं, तो इसका सीधा असर गरीबों की थाली पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग खुद खरीदकर नहीं खाते, वे इस दर्द को नहीं समझ सकते।


‘अगर महंगा ही करना था तो सीधे 1000 रुपये बढ़ा देते, 7 रुपये कम रखकर किस पर एहसान कर रहे हैं?’


दिल्ली में कीमतें 3,000 रुपये के पार

इस नई बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत अब 3,071.50 रुपये हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वृद्धि का असर रेस्तरां और बाहर खाने की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम आदमी की जेब पर और बोझ बढ़ेगा।


तीसरी बार बढ़े दाम

2026 में यह तीसरी बार है जब कमर्शियल गैस के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को ₹144 और 1 अप्रैल को ₹200 की वृद्धि हुई थी। लेकिन इस बार की ₹993 की बढ़ोतरी ने होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की चिंता बढ़ा दी है।


घरेलू सिलेंडर की कीमतें स्थिर

हालांकि, आम जनता के लिए एक अच्छी खबर यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं। दिल्ली में यह ₹913 पर बनी हुई है।


कीमतों में वृद्धि के कारण

इस बेतहाशा वृद्धि के पीछे कुछ वैश्विक भूराजनीतिक कारण हैं:


  • मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में आपूर्ति बाधित हुई है।
  • भारत अपनी LPG और कच्चे तेल की जरूरत का अधिकांश हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है।
  • औद्योगिक क्षेत्रों के लिए गैस की आपूर्ति में कटौती की गई है।
  • भारत फिलहाल रूस से तेल मंगाकर आपूर्ति को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।