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मलमास 2026: पितृ और गुरु दोष से मुक्ति के प्रभावी उपाय

मलमास 2026 में पितृ और गुरु दोष से मुक्ति के लिए कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। इस दौरान पूजा, दान और जप का विशेष महत्व है। जानें कैसे तर्पण, पीपल पूजा और गीता पाठ से आप इन दोषों के नकारात्मक प्रभावों से राहत पा सकते हैं। साथ ही, गुरु दोष के लक्षण और निवारण के उपाय भी जानें।
 

मलमास में दोष निवारण के उपाय

मलमास 2026: पितृ दोष और गुरु दोष का निवारण: सनातन धर्म में मलमास का समय आध्यात्मिक साधना और दोष निवारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में विवाह और मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है, लेकिन पूजा, दान और जप का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस समय किए गए जप, तप और दान का फल दीर्घकालिक होता है। इसके अलावा, कुछ विशेष उपाय पितृ दोष और गुरु दोष को शांत करने में सहायक होते हैं। आइए जानते हैं मलमास में किए जाने वाले प्रभावी उपायों के बारे में, जो इन दोषों के नकारात्मक प्रभावों से राहत दिला सकते हैं।


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पितृ दोष के लक्षण


ज्योतिष में पितृ दोष का अर्थ है पूर्वजों के कारण वंशजों को होने वाले कष्ट। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार रुकावटें, आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक कलह या मानसिक तनाव हो, तो इसे पितृ दोष माना जाता है। समय पर विवाह न होना, परिवार में बीमारियों का रहना, तरक्की में रुकावट, धन होते हुए भी मानसिक शांति न मिलना, संतान न होना, शिक्षा में बाधाएं आना और बिना कारण परेशानियों का बढ़ना भी इसके संकेत हैं।



  1. तर्पण और पिंडदान: मलमास में अमावस्या और शनिवार को तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना जाता है। इस दौरान जल में काले तिल और कुश डालकर पितरों को अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

  2. पीपल पूजा: पीपल के पेड़ को पितरों का वास माना जाता है। इसलिए मलमास के दौरान शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करना लाभकारी होता है। कई लोग नियमित रूप से पीपल की परिक्रमा भी करते हैं।

  3. गीता पाठ: मलमास को अधिकमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। इस महीने में श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से मानसिक शांति और घर में सकारात्मकता आती है।

  4. दान-पुण्य: मलमास में जरूरतमंदों को अन्न और जल दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। गर्मी के मौसम में सत्तू, पानी का घड़ा, फल और तांबे के बर्तन दान करने की परंपरा है। अन्न-जल दान से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।


गुरु दोष के लक्षण


ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। जब गुरु कमजोर होता है, तो व्यक्ति की निर्णय क्षमता प्रभावित होती है। डरावने सपने, मानसिक अस्थिरता और नकारात्मक विचारों का बढ़ना गुरु दोष के संकेत हैं।


गुरु दोष से मुक्ति के उपाय



  • मलमास में गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना और केले के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है।

  • भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का जाप करना भी सहायक होता है।

  • इस महीने पीली वस्तुओं जैसे हल्दी, चने की दाल, केला और पीले कपड़ों का दान करना शुभ होता है। साथ ही, पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी लाभकारी होता है।


अन्य सरल उपाय



  • सुबह और शाम को घर में कपूर जलाने से देव दोष और पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

  • अमावस्या या पूर्णिमा पर गुड़-घी की आहुति देना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन उपायों को श्रद्धा से करने से मानसिक शांति और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।