ममता बनर्जी की पार्टी में उठापटक: दो विधायकों को किया गया निलंबित
टीएमसी में ममता बनर्जी की चुनौतियाँ
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए हालात कठिन होते जा रहे हैं, खासकर चुनाव में हार के बाद। उनके विधायक अब उनकी बातों को अनसुना कर रहे हैं। जब ममता सत्ता में थीं, तब उनके एक इशारे पर सभी नेता एकजुट हो जाते थे, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
पार्टी के भीतर विरोधी गतिविधियों के आरोप में, ममता ने रविवार को एक बैठक बुलाई, जिसमें केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। इस स्थिति को देखते हुए बैठक को रद्द कर दिया गया। ममता ने आज अपने दो विधायकों को पार्टी से निकालने का निर्णय लिया है, जिसे पार्टी में एक 'सर्जरी' के रूप में देखा जा रहा है।
टीएमसी में निष्ठा का संकट
तीन विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल करने के बाद, ममता को चौथे चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। टीएमसी को केवल 80 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी ने पहली बार राज्य में सरकार बनाई। इस बदलाव के बाद, टीएमसी के नेताओं की निष्ठा भी बदलने लगी है। कई नेता पार्टी से दूरी बना रहे हैं या पार्टी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
ममता ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में विधायकों रीताब्रजा बनर्जी और संदीपन साहा को बाहर का रास्ता दिखाया है।
विधायकों की अनुपस्थिति और सुरक्षा चिंताएँ
30 मई को ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर एक हमले का प्रयास किया गया, जिसमें वह बाल-बाल बचे। इसके अगले दिन, कल्याण बनर्जी ने भी खुद पर हमले का दावा किया। इन घटनाओं के बाद ममता ने विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन केवल 20 विधायक ही पहुंचे। इस स्थिति ने स्पष्ट कर दिया कि टीएमसी में ममता की बात अब सुनने वाला कोई नहीं है।
विधायकों की अनुपस्थिति के कारण बैठक को रद्द कर दिया गया। पार्टी नेता कुणाल घोष ने मीडिया को बताया कि 1 और 2 जून को पार्टी ने आंदोलन की योजना बनाई है। ऐसे में विधायकों का अपने क्षेत्र में रहना ज्यादा महत्वपूर्ण है।