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मनमोहन सिंह की चुनाव आयोग के प्रति सम्मान और SY कुरैशी की यादें

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चुनाव आयोग के प्रति सम्मान और उनके साथ हुई महत्वपूर्ण बातचीत को साझा किया। कुरैशी ने बताया कि कैसे मनमोहन सिंह ने अपनी मंत्रियों की बेतुकी बातों पर प्रतिक्रिया दी और चुनाव आयोग की निंदा को अस्वीकार किया। इस लेख में 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान हुई घटनाओं और कुरैशी की हरीश खरे के साथ बातचीत का भी जिक्र है, जो उस समय के प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार थे। जानें पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
 

SY कुरैशी का बयान

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त SY कुरैशी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चुनाव आयोग का गहरा सम्मान करते थे। उन्होंने एक घटना को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें UPA सरकार के दौरान मंत्रियों की 'बेतुकी बातों' के बारे में बताया गया, तो मनमोहन सिंह ने कहा, 'अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।' कुरैशी ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यह सुनकर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ और वे इसके लिए तैयार नहीं थे। उन्हें मनमोहन सिंह को शांत करने में लगभग 15-20 मिनट लगे। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग पर कोई भी आरोप मनमोहन सिंह को स्वीकार्य नहीं था।


2012 के विधानसभा चुनावों की घटना

यह घटना 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान की है, जब चुनाव आयोग ने केंद्रीय कानून और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद को उनकी टिप्पणियों के लिए चेतावनी दी थी। कुरैशी ने कहा कि उस समय खुर्शीद ने कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आई, तो वे अल्पसंख्यकों के लिए कोटा बढ़ा देंगे। बीजेपी ने तुरंत चुनाव आयोग से शिकायत की। चुनाव आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और खुर्शीद को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया। इसके बाद, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग और कुरैशी के खिलाफ अनर्गल बातें करना शुरू कर दिया।


हरीश खरे के साथ बातचीत

कुरैशी ने हरीश खरे के साथ अपनी बातचीत को याद किया, जो उस समय मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार थे। उन्होंने कहा कि एक बार जब खरे उनसे मिले, तो उन्होंने कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदार बातें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। कुरैशी ने खरे से कहा कि अगर यह मीडिया में आया, तो सरकार को मुश्किल होगी। खरे ने पूछा कि क्या उन्हें यह बात प्रधानमंत्री को बतानी चाहिए। कुरैशी ने कहा कि यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचनी चाहिए। अगले दिन, मनमोहन सिंह का कुरैशी को घबराहट भरा फोन आया, जिसमें उन्होंने कहा, 'अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा...' कुरैशी ने कहा कि उन्हें मनमोहन सिंह को शांत करने में समय लगा।